सरकारी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के कारण लुट रहे मरीज तथा परिजन

Updated at : 29 Jul 2024 11:10 PM (IST)
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सरकारी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के कारण लुट रहे मरीज तथा परिजन

102 एंबुलेंस चालक एवं कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मरीज एवं परिजन बेहाल हैं.

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दरभंगा. 102 एंबुलेंस चालक एवं कर्मचारियों की हड़ताल के कारण मरीज एवं परिजन बेहाल हैं. हड़ताल के कारण निजी एंबुलेंस चालकों की चांदी कट रही है. डीएमसीएच के सीओटी में ऑपरेशन के बाद सर्जरी बिल्डिंग में स्थानांतरण के लिये निजी वाहन चालक 300 से 500 रुपये वसूल रहे हैं. वहीं मरीजों को जिले के विभिन्न अस्पतालों से पटना ले जाने का न्यूनतम किराया 5000 से शुरू होता है. विभिन्न प्रखंडों से डीएमसीएच के लिए 2000 रुपये से कम में बात नहीं बन रही. एसी वाहन का किराया 3000 अधिक लिया जा रहा है. इस कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीज व परिजनों को काफी परेशानी हो रही है. बता दें कि 102 एंबुलेंस चालक कर्मचारी संघ के बैनर तले 286 एंबुलेंस चालक एवं इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (इएमटी) विभिन्न मांगों को लेकर 40 दिनों से हड़ताल पर हैं. जानकारी के अनुसार डीएमसीएच सहित अन्य प्रखंड के अस्पतालों में कुल 52 एंबुलेंस की तैनाती है. सबसे अधिक डीएमसीएच में एक दर्जन एंबुलेंस का सर्विस है. प्रखंडों में मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिये 40 एंबुलेंस संचालित है. विभाग के पास कुल 64 एबुलेंस है. इसमें से 12 कई माह से खराब है. 52 एंबुलेंस से सर्विस ली जाती थी. हड़ताल के कारण सभी वाहनों का परिचालन ठप है. संघ के सदस्यों ने बताया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जायेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रमुख मांगों में श्रम अधिनियम के तहत तीन माह का लंबित पारिश्रमिक का भुगतान, पीएफ व इएमआइ का भुगतान, छटनीग्रस्त कर्मियों को वापस लेना आदि शामिल है. बताया जाता है कि एंबुलेंस संचालन का कार्य नये ठेकेदार को दिया गया है. इससे कर्मियों के बकाये दो माह के पारिश्रमिक भुगतान को लेकर पेंच फंस गया है. कर्मियों ने बताया कि जब तक पिछले दो माह का बकाया पारिश्रमिक भुगतान नहीं किया जायेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. कहा कि इस मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा. डीएम राजीव रौशन ने बताया कि एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से परेशानी हो रही है. इस बाबत विभाग को पहले भी सूचित किया गया था. कर्मियों का आवेदन डिपार्टमेंट को भेजा गया था. जल्द समस्या का समाधान नहीं होगा, तो फिर से विभाग को रिमाइंडर भेजा जायेगा.

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