600 KG सोना दान करने वाली महारानी नहीं रहीं, दरभंगा राज परिवार ने क्या-क्या किया था दान? पढ़िए त्याग और विरासत की पूरी कहानी

Published by :Abhinandan Pandey
Published at :12 Jan 2026 4:54 PM (IST)
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darbhanga raj story| Darbhanga Raj donated 600 kg of gold during Indo-China war

दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी देवी और महाराजा की फाइल फोटो

Bihar News: दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. उनके निधन से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक का माहौल है. राज परिवार की एक ऐतिहासिक विरासत का अंत माना जा रहा है. इस खबर में पढ़िए संकट के समय में भारत को राज परिवार ने क्या-क्या दान किया.

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Bihar News: दरभंगा राज परिवार की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रही थीं. 96 वर्ष की उम्र में उन्होंने दरभंगा स्थित राज परिवार के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.

महारानी के निधन को राज परिवार ने अपूरणीय क्षति बताया है. परिवार के सदस्य और शुभचिंतक बड़ी संख्या में कल्याणी निवास पहुंचे हैं. अंतिम संस्कार श्यामा माई मंदिर परिसर में पारंपरिक विधि-विधान से किया जा रहा है. प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है.

1962 में हो गया था महाराजा का निधन

प्रियांशु झा ने बताया कि महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन सादगी, सेवा और परंपरा का प्रतीक रहा. उनका जाना सिर्फ राज परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे मिथिला के लिए एक युग के अंत जैसा है.

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं. 1940 के दशक में उनका विवाह महाराजा कामेश्वर सिंह से हुआ था. महाराजा का निधन वर्ष 1962 में हो गया था. उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में हुआ था. जबकि दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का देहांत 1940 में ही हो गया था.

महात्मा गांधी ने दरभंगा राज को लिखा था लेटर

प्रियांशु झा ने बताया कि दरभंगा राज परिवार देश सेवा में हमेशा आगे रहा है. जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, तब उनके आंदोलन को आर्थिक और प्रचार से जुड़ी कई परेशानियां थीं. गांधी जी ने मदद के लिए दरभंगा राज को लेटर लिखा था.

पत्र मिलते ही महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने पूरा मीडिया प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया. साथ ही गांधी जी को आर्थिक सहयोग भी दिया. दरभंगा राज महात्मा गांधी का पहला बड़ा सहयोगी माना जाता है. गांधी जी के हाथों लिखा वह पत्र आज भी सुरक्षित रखा गया है.

1962 के युद्ध में दिया ऐतिहासिक दान

भारत-चीन युद्ध के दौरान साल 1962 में जब देश संकट में था, तब दरभंगा राज सबसे पहले मदद के लिए सामने आया. दरभंगा के इंद्रभवन मैदान में 15 मन यानी करीब 600 किलो सोना तौलकर देश को दान दिया गया. इतना ही नहीं, राज परिवार ने अपने तीन विमान भी देश को सौंप दिए. साथ ही 90 एकड़ में फैला निजी एयरपोर्ट भी सरकार को दान कर दिया गया. आज इसी भूमि पर दरभंगा एयरपोर्ट बना है.

शिक्षा और आजादी की लड़ाई में भी योगदान

प्रियांशु झा बताते हैं कि दरभंगा राज ने आजादी की लड़ाई और शिक्षा के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक योगदान दिया. इंडियन नेशनल कांग्रेस के संस्थापक एओ ह्यूम को आर्थिक मदद देकर आंदोलन को जिंदा रखा गया. साल 1880 में हर साल 10 हजार रुपये की मदद दी जाती थी. दरभंगा राज परिवार ने देश को पहली यूनिवर्सिटी भी दी. इसके लिए 230 एकड़ जमीन दान की गई थी. राज परिवार का मानना था कि ज्ञान और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है.

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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