पेयजल संकट से मरीज हलकान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Jun 2017 4:33 AM (IST)
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परेशानी . डीएमसीएच परिसर में खराब पड़े हैं आधे से अधिक चापाकल दरभंगा : उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच में मरीज पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं. गर्मी बढ़ने के साथ ही यह समस्या लोगों को परेशान कर रही है. परिसर में लगे करीब आधे दर्जन चापाकल का हलक सूख चुका है. […]
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परेशानी . डीएमसीएच परिसर में खराब पड़े हैं आधे से अधिक चापाकल
दरभंगा : उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच में मरीज पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं. गर्मी बढ़ने के साथ ही यह समस्या लोगों को परेशान कर रही है. परिसर में लगे करीब आधे दर्जन चापाकल का हलक सूख चुका है. पेयजल के लिए लोग परिसर में इधर से उधर भटकते रहते हैं. अस्पताल प्रशासन समस्या से रूबरू होते हुए भी अनजान बना बैठा है. अमूमन इस मौसम में डीएमसीएच में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है.
चिलचिलाती धूप में पसीने से तड़बतड़ मरीज एवं परिजन प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन यहां परेशान दिखते हैं. परिसर का अधिकांश चापाकल खराब होने के कारण प्यास बुझाने के लिए लोग या तो आसपास के होटलों की ओर जाते हैं या बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ता है. मालूम हो कि यहां हजारों की संख्या में मरीज रोजाना आते हैं.
नौ चापाकल खराब
डीएमसीएच में करीब 20 चापाकल है, जिसमें से 11 खराब है. इमरजेंसी विभाग में दो चापाकल है, जिसमें एक खराब है. सर्जरी विभाग में दो चापाकल है, जिसमें एक खराब है. मेडिसिन विभाग की स्थिति सबसे दयनीय है. यहां छह चापाकलों में चार खराब है. ऐसी ही स्थिति गायनिक विभाग की है
यहां सात चापाकलों में पांच चापाकल खराब पड़ा है. सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी विभाग में है, जहां एक ही चापाकल है. यहां पर पानी लेने के लिए परिजनों की लाइन लगी रहती है. इमरजेंसी एवं सर्जिकल सर्जरी विभाग के मरीजों एवं परिजनों की प्यास एक यह चापाकल ही बुझाता है. यहां पानी लेने के लिए लोगों की हमेशा भीड़ बनी रहती है. अधिक लोड होने के कारण यह भी बराबर ख़राब होते रहता है.
भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे लोग बाजार से खरीद रहे बोतलबंद पानी
गंदगी के बीच पानी
लेने की मजबूरी
डीएमसीएच में जो चापाकल चालू हालत में है वहां से पानी लेना खतरे से खाली नही है. लोग स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर यहां से पानी लेते हैं. चापाकल के आसपास गंदगी ही गंदगी रहती है. कीचड़ में सूअर लोटता रहता है. लोग कीचर पार कर पानी लेने चापाकलों पर पहुंचते हैं. इन चापाकलों के पानी की जांच करने पर हकीकत सामने आ जाएगा.
जांच कराने में मरीज व परिजनों को परेशानी
यूरिन जांच के लिए मरीज को खूब पानी पीना होता है. मरीजों को पानी पिलाने के लिए परिजन बाहर से पानी लाने को मजबूर होते हैं. जांच घर परिसर में कोई चापाकल नहीं है. एकलौता चापाकल महीनों से खराब पड़ा है. यही स्थिति अल्ट्रासाउंड विभाग के बाहर के चापाकल की है. अल्ट्रासाउंड से पहले मरीजों को चिकित्सक खूब पानी पीने को कहते हैं, लेकिन चापाकल खराब होने के कारण परिजनों को पानी दूसरे वार्डों सेलाना पड़ता है.
पुत्र का इलाज कराने आए हैं. पानी की यहां बड़ी समस्या है. इमरजेंसी विभाग में एक चापाकल है, सारे लोग पानी भरने यहीं आते हैं. दूर से पानी लाना पड़ता है. इस उम्र में कठिन लग रहा है.
देवनारायण गिरी, हायाघाट
पुत्रवधु का इलाज करवा रहे हैं. गर्मी के मौसम में पानी भरते- भरते हाथ टूट गया है. वार्ड में सप्लाई का पानी नहीं है. चापाकल से पानी ठीक से नहीं निकलता है. पीने के पानी का यहां घोर अभाव है.
रामचंद्र पंडित, बहेड़ी
सुना था डीएमसीएच बहुत बड़ा अस्पताल है, पर यहां पीने का पानी भी नहीं है. गांव के जैसा ही यहां पानी लेने के लिए चापाकल पर भीड़ लगी रहती है. सरकार को यहां और चापाकल कराना चाहिए. परिजनो को पानी के लिए अत्यधिक कठिनाई झेलनी पड़ रही है.
पिंकी देवी, हीरोपट्टी, मधुबनी
पति का इलाज कराने डीएमसीएच आयी हूं. गर्मी में पानी के लिए यहां बहुत दिक्कत है. जो चापाकल ठीक है वह भी ढ़ंग से काम नहीं कर रहा है. पानी से दुर्गंध आ रहा है. मजबूरी में यही पानी पीना पड़ रहा है. चारों तरफ गंदगी है.
पवन देवी, बिरौल
पीएचइडी विभाग को चापाकल ठीक करने के लिए लिखा गया है. शीघ्र ही सभी खराब चापाकल को दुरुस्त करा लिया जायेगा.
संतोष कुमार मिश्र, अधीक्षक, डीएमसीएच
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