पेड़ के नीचे बच्चे करते मध्याह्न भोजन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Sep 2016 5:24 AM (IST)
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प्रावि को अपना भवन नहीं. दुग्ध उत्पादन केंद्र में चल रहा विद्यालय अनुसूचित जाति के बच्चों की सुधि लेनेवाला कोई नही जाले : स्थानीय प्रखंड क्षेत्र की जाले दक्षिणी पंचायत के लातराहा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय लतराहा अनुसूचित जाति टोला के छात्र-छात्रा ताड़ के पेड़ की छांवों में मध्याह्न भोजन खाने को विवश हैं. चारों […]
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प्रावि को अपना भवन नहीं. दुग्ध उत्पादन केंद्र में चल रहा विद्यालय
अनुसूचित जाति के बच्चों की सुधि लेनेवाला कोई नही
जाले : स्थानीय प्रखंड क्षेत्र की जाले दक्षिणी पंचायत के लातराहा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय लतराहा अनुसूचित जाति टोला के छात्र-छात्रा ताड़ के पेड़ की छांवों में मध्याह्न भोजन खाने को विवश हैं. चारों ओर फैली गंदगियों के बीच बच्चे पंक्ति में बैठकर मेन्यू के मुताबिक खिचड़ी चोखा खाते दिखे. उक्त पंचायत के दुग्ध उत्पादन केंद्र के भवन में चलाए जा रहे इस विद्यालय में मात्र दो कमरे हैं. केवल दो तरफ बरामदा है. इसके एक कमरे में कार्यालय के कागजात के साथ-साथ मध्यान भोजन बनता है, तो दूसरे कमरे तथा बरामदा पर एक से लेकर पांच तक का वर्ग संचलित होता है.
बच्चों की उपस्थिति रहती बेहतर.इस विद्यालय में कुल नामंकित 179 छात्रों में 138 छात्र-छात्रा उपस्थित दिखे. इन बच्चों में शिक्षा के प्रति आकर्षण का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यहां नामांकित बच्चों में अधिकांश की उपस्थिति रहती है. बावजूद इन्हें बुनियादी सुविधा मुहैया कराने का परिणामदायी पहलकदमी नहीं की जा रही. बता दें कि बुधवार को इसके कक्षा एक में कुल नामांकित 21 छात्रों में 12 छात्र-छात्रा उपस्थित थे. कक्षा दो में कुल नामांकित 43 छात्रों में 28 छात्र-छात्रा, कक्षा तीन में कुल नामांकित 44 छात्रों में 38 छात्र-छात्रा, कक्षा चार में कुल नामांकित 40 छात्रों में 34 छात्र-छात्रा उपस्थित थे. वहीं कक्षा पांच में कुल नामांकित 31 विद्यार्थियों में 26 छात्र-छात्रा उपस्थित थे. इस प्रकार इस विद्यालय में प्रधानाध्यापिका बबली कौर सहित दो सहायक शिक्षक अर्चना कुमारी एवं रविकांत ठाकुर पदस्थापित हैं.
9 साल बाद भी अपना भवन नसीब नहीं
वर्ष 2007 में यह विद्यालय खुला. तब से इसे अपना भवन नसीब नहीं हो सका है. इसका संचालन इसी भवन में हो रहा है. जाले-अतरवेल मुख्य मार्ग के सटे किनारे में अवस्थित इस विद्यालय में चहारदिवारी न होने से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. विद्यालय को अपनी जमीन नहीं होने के कारण इसके भवन का भी निर्माण नहीं हो रहा है. बरामदा पर वर्ग संचालन होने के कारण ताड़ की छांव ही एक मात्र जगह बचती है, इन बच्चों को खिलाने के लिए. बगल में पान-बाड़ी में खाना खिलाने पर उसके संरक्षक हल्ला करने लगते हैं. मजबूरन ताड़ की छांव में ही खिलाना पड़ता है.
भूमि नहीं रहने की वजह से परेशानी
मुखिया राजदेव महतो से पूछने पर उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण ही यह विद्यालय दुग्ध उत्पादन केंद्र में चलाया जा रहा है. जमीन की तलाश अपने स्तर कर रहा हूं. मिलते ही इसे वहां शिफ्ट कर दिया जायेगा. ग्रामीण संजय पूर्वे, अमलेश ठाकुर, ललित कुमार आदि ने कहा कि मुख्य मार्ग के किनारे रहने के बावजूद इस मार्ग से गुजरने वाले आला अधिकारियों की भी नज़र आज तक नहीं पड़ी है, जब कि आज तक कभी भी यह विद्यालय बंद नहीं रहा है.
जमीन उपलब्ध होते ही दूर होगी समस्या
बीइओ अहिल्या कुमारी कहती हैं कि प्रखंड क्षेत्र के कई भूमिहीन विद्यालयों में एक यह भी विद्यालय है. अंचलाधिकारी से बार-बार कहने के बावजूद उनके द्वारा जमीन नहीं उपलब्ध करवाई जा सकी है. जैसे ही कहीं जमीन उपलब्ध होगी इसे तत्काल ही पदस्थापित कर दिया जायेगा.
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