रेल यात्रियों की सुरक्षा दावं पर

Published at :06 Sep 2016 4:58 AM (IST)
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रेल यात्रियों की सुरक्षा दावं पर

दरभंगा : समस्तीपुर रेल मंडल के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन दरभंगा जंकशन के यात्रियों की सुरक्षा दांव पर लगी है. यहां का यार्ड खुला पड़ा है. इससे होकर लोग आवागमन करते हैं.नेपाल सीमा से यह क्षेत्र सटा हुआ है. साथ ही नक्सल प्रभावित भी रहा है. ऐसे में किसी भी बड़ी घटना का खतरा हमेशा बना […]

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दरभंगा : समस्तीपुर रेल मंडल के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन दरभंगा जंकशन के यात्रियों की सुरक्षा दांव पर लगी है. यहां का यार्ड खुला पड़ा है. इससे होकर लोग आवागमन करते हैं.नेपाल सीमा से यह क्षेत्र सटा हुआ है. साथ ही नक्सल प्रभावित भी रहा है. ऐसे में किसी भी बड़ी घटना का खतरा हमेशा बना रहता है. आलम यह है कि अगर यार्ड में खड़ी ट्रेन में अपराधी तत्व अगर कुछ करतूत कर दें तो कोई बड़ी बात नहीं, कारण एक किमी लंबे यार्ड की सुरक्षा के लिए महज एक से दो आरपीएफ के जवान ही तैनात रहते हैं.

जवानों की किल्लत के कारण किसी तरह सुरक्षा की जद्दोजहद की जा रही है.
सबसे खतरनाक यह है कि यार्ड से होकर आम राहगीर आवागमन करते हैं. इन्हें रोक पाना भी खतरनाक है, कारण रेलवे लाइन के पूरब हजारों की आबादी बसती है. पुल के अभाव में यार्ड से होकर ही मजबूरन लोग आया-जाया करते हैं. ऐसे में अगर असामाजिक तत्व इसका लाभ उठा ले तो कोई बड़ी बात नहीं.
खड़ी रहतीं महत्वपूर्ण ट्रेनें : दरभंगा जंकशन से दिल्ली, मुंबई, सिकंदराबाद, पूणे, बेंगलुरू सरीखे महानगरों के लिए ट्रेनें खुलती हैं. यहां आने के बाद वाशिंग पिट पर उसकी साफ-सफाई की जाती है. इसके बाद यार्ड में ट्रेन को लगा दिया जाता है. जब भीड़ बढ़ती है तो आरपीएफ के लाख पाबंदी के बावजूद यात्री यार्ड में ही चढ़ जातें हैं होनी चाहिए चहारदीवारी : रेलवे के नियमानुसार यार्ड दोनों तरफ से बंद होना चाहिए. इसके दोनों दिशाओं में चहारदीवारी होनी चाहिए. आज तक इस दिशा में पहल नहीं की गयी. जंकशन से लेकर बेला गुमटी तक करीब एक किलोमीटर यार्ड खुला पड़ा है.
कई बार इसको लेकर महकमा को आरपीएफ की ओर से लिखा भी गया, लेकिन आजतक नतीजा सिफर ही रहा. कहा जाता है कि यार्ड बंद होने पर एक जवान भी सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं. कारण बाहरी तत्व नजर आते ही उसे पकड़ा जा सकता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह नामुमकिन है.
यार्ड से ही गुजरते हैं कई राहगीर
खुला पड़ा है दरभंगा जंकशन का यार्ड
एक किमी लंबे यार्ड की सुरक्षा में रहते एक से दो जवान
नेपाल से सटा नक्सल प्रभावित रहा है क्षेत्र
यार्ड में भगवान भरोसे खड़ी रहती हैं गाड़ियां
बीच यार्ड से होकर आते-जाते हैं राहगीर
वाशिंग पिट पर भी रहते हैं जवान
सुरक्षा की दृष्टि से यार्ड में चहारदीवारी का निर्माण होना चाहिए. वैसे ट्रेनों की सुरक्षा के लिए विशेष चौकसी बरती जाती है. अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया जाता है. वाशिंग पिट पर भी जवान मुस्तैद रहते हैं. खुले यार्ड से परेशानी होती है लेकिन काम चल रहा है.
अजय प्रकाश, इंस्पेक्टर आरपीएफ
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