पड़ोसी देशों से भारत में है पोलियो का खतरा

Published at :28 Dec 2015 6:46 PM (IST)
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पड़ोसी देशों से भारत में है पोलियो का खतरा

पड़ोसी देशों से भारत में है पोलियो का खतरा जागरूक रहें, बच्चों को पिलाएं आइपीवीफोटो संख्या- 17परिचय- प्रेसवार्ता में बोलते डीआइओ डा. महादेव प्रसाद व यूनिसेफ के जिला समन्वयक शशिकांत सिंह.दरभंगा. भारत से पोलियो मुक्त हो चुका है. भारत में पोलियो का आखिरी केस जनवरी 2011 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में पाया गया […]

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पड़ोसी देशों से भारत में है पोलियो का खतरा जागरूक रहें, बच्चों को पिलाएं आइपीवीफोटो संख्या- 17परिचय- प्रेसवार्ता में बोलते डीआइओ डा. महादेव प्रसाद व यूनिसेफ के जिला समन्वयक शशिकांत सिंह.दरभंगा. भारत से पोलियो मुक्त हो चुका है. भारत में पोलियो का आखिरी केस जनवरी 2011 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में पाया गया था. जबकि बिहार में इसका अंतिम केस सितंबर 2010 में पाया गया था. भारत को पोलियो मुक्त घोषित किये जाने के बावजूद अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में वाइल्ड पोलियो वायरस अबतक मौजूद है. ये दोंनो देश पोलियो से अभी तक मुक्त नहीं हो पाये हैं. पोलियो वायरस एक देश से दूसरे देश में जाने का खतरा बना हुआ है. इससे सचेत रहने के लिए बिहार समेत भारत के अन्य जिलों में इनेक्टिव वेटिड पोलियो वायरस वैक्सीन(आइपीवी) की शुरूआत की गयी है. प्रेसवार्ता में मिलिए कार्यक्रम में सोमवार को जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. महादेव प्रसाद एवं यूनिसेफ के जिला समन्वयक शशिकांत सिंह ने यह बातें कही. डीआइओ डा. प्रसाद ने बताया कि बिहार में सात दिसंबर से आइपीवी का कार्यक्रम शुरू हुआ है. इसे छह माह तक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाना है. इसमें दो वायरस मारने की क्षमता है. इस वायल को एक साल तक भीतर बच्चों के मांसपेशियों में इंजेक्शन के द्वारा सूई देना है. इससे ऐसे बच्चों में इम्युनिटी पावर पैदा होती है. इससे वायरस आने का खतरा कम रहता है. ये दवा खून में जाकर इम्युनिटी को बढ़ाता है. बाजार में आइपीवी का वायल का कीमत 1500 रुपये है जबकि सरकार की ओर से ऐसे बच्चों को मुफ्त दिया जा रहा है. अधिकारियों ने अभिभावकों को अपनी बच्चों को आइपीवी का वायल दिलाने की अपील की है. क्यों है आवश्यकअधिकारियों ने बताया कि इम्युनिटी के उच्च स्तर को बनाये रखने व वाइल्ड पोलियो वायरस पर नियंत्रण के लिए इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन शुरू किया गया है. जब आइपीवी इंजेक्शन और ओपीवी की तीसरी खुराक एक साथ दी जाती है तो बच्चों और समाज दोनों की पोलियो से दोहरी हिफाजत होती है. ये दोंनो मिलकर पोलियो वायरस के दुबारा पनपने और उसे दुबारा संक्रमित करने से रेाकते हैं. वर्तमान में दुनिया के 30 देशों ने अपने टीकाकरण कार्यक्रम में आइपीवी को शामिल किया है. आइपीवी के प्रारंभ के बावजूद भी ओरल पोलियो टीके जारी रहेगा. कब और कैसे लगेगा टीकानियमित टीकाकरण में शामिल होने के बाद नवजात शिशुओं को 14 सप्ताह से एक साल तक के बच्चों के लिए पोलियो का टीका सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध है. इसे पोलियो टीके के तीसरी खुराक के साथ बच्चों की दांयी जांघ पर लगाया जायेगा.

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