नहीं रहे मिथिला के अनमोल रत्न 'दुलार भैया', अपनी सुरीली आवाज से मोह लेते थे सबका मन

सुरों के साधक दयाकांत झा
Darbhanga News: दरभंगा के तारडीह क्षेत्र के प्रसिद्ध लोक कलाकार दयाकांत झा 'दुलार भैया' का 65 वर्ष की आयु में निधन. अपनी सुरीली आवाज, तबला वादन और हृदयस्पर्शी 'समदाऊन' गीतों के लिए विख्यात झा के जाने से सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है. पढ़ें पूरी खबर...
दरभंगा के तारडीह से विनोद कुमार की रिपोर्ट
Darbhanga News: मिथिला की लोक संस्कृति और गायन-वादन की दुनिया को एक अपूरणीय क्षति हुई है. तारडीह प्रखंड के नदीयामी पंचायत (बसाही टोल) निवासी प्रसिद्ध ग्रामीण कलाकार दयाकांत झा, जिन्हें लोग प्यार से ‘दुलार भैया’, ‘गुरुजी’ या ‘सोनू भैया’ कहते थे, सोमवार को इस दुनिया से विदा हो गए. 65 वर्ष की आयु में उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.
किसानी के साथ सुरों की साधना
दयाकांत झा एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने खेती-बारी के साथ-साथ अपनी गायकी और वादन को जीवित रखा. वे केवल गायक नहीं, बल्कि हारमोनियम और तबला वादक के रूप में भी विख्यात थे. स्थानीय धार्मिक अनुष्ठान, कीर्तन मंडली और दुर्गा पूजा उनके बिना अधूरी मानी जाती थी.
समदाऊन सुनकर छलक जाते थे आंसू
उनकी सबसे बड़ी पहचान उनके गाए ‘समदाऊन’ (विदाई गीत) थे. ग्रामीणों का कहना है कि जब वे भगवती दुर्गा या बेटी की विदाई के समय करुण स्वर में समदाऊन गाते थे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं लेते थे। उनकी आवाज का जादू दस कोसी क्षेत्र में प्रसिद्ध था.
कला के प्रति अटूट समर्पण
कला के प्रति उनका जुनून ऐसा था कि कहीं भी भजन-कीर्तन की सूचना मिलने पर वे कोसों दूर पैदल चलकर भी पहुंच जाते थे. गायकी के साथ-साथ वे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए नसीहतें भी दिया करते थे. उनके जाने से मिथिला की ग्रामीण कीर्तन परंपरा ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है.
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