डग्रिी वन के एक लाख छात्रों को है पंजीयन रसीद का दरकार

डिग्री वन के एक लाख छात्रों को है पंजीयन रसीद का दरकार डेढ़ वर्षों से इसके लिए छात्रों में मचा है हाहाकार दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत सभी अंगीभूत एवं संबद्ध इकाई के डिग्री वन सत्र 2014-15 के हजारों छात्र अपनी पंजीयन रसीद के लिए भटकते फिर रहे हैं, जबकि उन छात्रों ने संबंधित […]
डिग्री वन के एक लाख छात्रों को है पंजीयन रसीद का दरकार डेढ़ वर्षों से इसके लिए छात्रों में मचा है हाहाकार दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत सभी अंगीभूत एवं संबद्ध इकाई के डिग्री वन सत्र 2014-15 के हजारों छात्र अपनी पंजीयन रसीद के लिए भटकते फिर रहे हैं, जबकि उन छात्रों ने संबंधित कॉलेजो में विश्वविद्यालय प्रशासन की निर्धारित तिथि के अंदर ही पंजीयन शुल्क के साथ पंजीयन प्रपत्र भरकर महाविद्यालय में जमा कर दिया है. बावजूद इसके उन छात्राें को पंजीयन रसीद के लिए भटकना पड़ रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस काम के लिए अधिकृत अधिकारियों की कार्यक्षमता तथा इसके लिए की गयी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता नजर आ रहा है. इसे ऐसा भी कहा जा सकता है कि छात्रों की बढ़ती हुई संख्या के आगे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पंजीयन रसीद जारी करने के लिए की गयी व्यवस्था बौनी पड़ने लगी है. बता दें कि उक्त सत्र में करीब एक लाख छात्रों ने नामांकन करवाकर पंजीयन प्रपत्र जमा कर चुका है. जिनका द्वितीय खंड का परीक्षा भी नजदीक आ चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को उन छात्रों को पंजीयन रसीद उपलब्ध करवा पाने में सफलता नहीं मिल पायी है. विवि नियमावली के जानकारों की मानें तो विवि प्रशासन ने प्रावधान के अनुसार पंजीयन के लिए तो करीब दस वर्ष पूर्व से ही प्रशासनिक आदेश के तहत नियम तोड़ चुकी है. परंतु बीते दस वर्षों से निभाती आ रही परंपरा भी इस सत्र से तोड़कर पंजीयन संख्या के आवंटन का अधिकार कॉलेज प्रशासन को देकर गलती की संख्या बढ़ाती जा रही है. इसका नतीजा छात्रों को इस रूप में भुगतना पड़ रहा है कि कॉलेजों की ओर से पंजीयन संख्या का आवंटन एवं परीक्षा क्रमांक के आवंटन में कई छात्रों का परीक्षा क्रमांक एवं पंजीयन संख्या का आवंटन समान हो गया और उसे सुधार के लिए उन छात्रों के पास कोई ऐसा तथ्यपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर छात्र यह बता सके कि गलती उनकी नहीं, बल्कि कॉलेज व विवि प्रशासन की है. छात्राें को इसका नुकसान इस रूप में भी उठाना पड़ा रहा है कि इस तरह की गलती वाले छात्रों का परीक्षाफल भी लंबित हो रहा है. जानकारों का कहना है कि छात्रों के पंजीयन का अधिकार केवल विश्वविद्यालय के कुलसचिव को ही प्राप्त है. उसको धत्ता बताते हुए इसमें बदलाव कर प्रशासनिक आदेश के तहत छात्रहित को देखते हुए पिछले कुलपति ने इसकी जिम्मेवारी परीक्षा नियंत्रक के मत्थे मढ़ दिया था जो परंपरानुसार चलता आ रहा था. जिसे वर्तमान प्रशासक के कार्यकाल के दौरान उस गलती का एक कदम और आगे बढ़ाते हुए पंजीयन की जिम्मेवारी कॉलेज प्रशासन को सौंप दी. इसका खामियाजा भुगत रहे छात्र अपने पंजीयन रसीद के लिए करीब डेढ़ वर्षों से भटक रहे हैं. पता नहीं कि तृतीय खंड का परीक्षाफल प्राप्त करने तक इन्हें पंजीयन रसीद उपलब्ध करवा पाने में विवि प्रशासन को सफलता हाथ लगता है या नहीं. इस बाबत पूछे जाने पर विवि की ओर से पंजीयन की ओर से अधिकृत परीक्षा नियंत्रक डॉ कुलानंद यादव ने बताया कि पंजीयन रसीद निर्गत करने में अभी देर लगने की उम्मीद है.
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