डीएमसीएच का योग केंद्र है बदहाल

Published at :25 Dec 2015 4:29 AM (IST)
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डीएमसीएच का योग केंद्र है बदहाल

योग प्रशिक्षक नदारद, चैम्बर खुला दरभंगा : डीएमसीएच में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए 2010 में योग केंद्र खोला गया था. इसका संचालन डीएमसीएच के ऑडिटोरियम में मेडिसिन के तत्कालीन एचओडी डा. एके गुप्ता के नेतृत्व में चला. हड्डी रोग, मेडिसिन और फिजियोथेरेपी विभाग के डॉक्टर जिस रोग के उपचार मेंं असफल हो जाते, […]

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योग प्रशिक्षक नदारद, चैम्बर खुला

दरभंगा : डीएमसीएच में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए 2010 में योग केंद्र खोला गया था. इसका संचालन डीएमसीएच के ऑडिटोरियम में मेडिसिन के तत्कालीन एचओडी डा. एके गुप्ता के नेतृत्व में चला. हड्डी रोग, मेडिसिन और फिजियोथेरेपी विभाग के डॉक्टर जिस रोग के उपचार मेंं असफल हो जाते,
उन मरीजों का इलाज इस योग केंद्र में किया जाता था.
यह देख मरीजों के मन में आस जगी और ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी. इसको लेकर केंद्र का स्थल ओपीडी के मेडिसिन विभाग के कार्यालय के बगल में चला गया. कुछ दिन औपचारिकता पूरी की गयी. इसके बाद इस कार्यालय में मात्र बोर्ड टंगा हुआ है. लेकिन योग प्रशिक्षक नदारद हैं. यह प्रक्रिया कई सालों से यहां चला आ रहा है. इस केंद्र पर न तो जिला प्रशासन और न ही डीएमसीएच प्रशासन की नजर है.
गंभीर मरीज होते थे रेफर
योग केंद्र में हड्डी, मेडिसिन और फिजीयोथेरेपी के गंभीर मरीजों को डाक्टर रेफर करते थे. इसमें गठिया, अर्थराइटिस, श्वसन संबंधी अन्य रोगों का इलाज संभव होता था. मरीज तय समय पर आते और योग प्रशिक्षक ऐसे रोगियों को तरह-तरह के योग का नुस्खे बता उनके बीमारी को ठीक कर देते थे.
यह है योग केंद्र का हाल
ओपीडी में स्थित योग केंद्र में योग प्रशिक्षक नहीं हैं. लेकिन इस केंद्र में कुर्सी, टेबुल, बेसीन और चतुर्थ वर्गीय कर्मियों का पुख्ता इंतजाम है. योग प्रशिक्षक भले वहां से नदारद रहते हों, लेकिन केंद्र पर योग प्रशिक्षण का बोर्ड लगा हुआ है. केंद्र का दरवाजा खुले रहने के कारण और चैंबर में किसी का न देख अन्य विभाग के मरीज व परिजन यहां आराम करते हैं.
अब नहीं होते मरीज रेफर
गंभीर रोगों के इलाज के लिए अब डाक्टरों ने योग केंद्र में मरीज को रेफर करना कई सालों से बंद कर दिया है. तीन विभागों के डाक्टरों का कहना है कि जब योग प्रशिक्षक नहीं रहते हैं, तो मरीज को परेशान क्यों करें.
सात माह से मानदेय बंद
योग प्रशिक्षक के मानदेय भुगतान का पावर सिविल सर्जन को है. इधर सरकार से इस मद में आवंटन राशि नहीं आने के कारण करीब सात माह से योग प्रशिक्षक का मानदेय बंद है.
दूसरी ओर, सिविल सर्जन डा. श्रीराम सिंह ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं हैं. वे डीपीएम से बात कर जानकारी देंगे.
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