वज्ञिापन विभाग के लिए ......भगवती श्यामा : चिताभूमि बना आस्था का केंद्र

Updated at :08 Dec 2015 7:38 PM
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वज्ञिापन विभाग के लिए ......भगवती श्यामा : चिताभूमि बना आस्था का केंद्र

विज्ञापन विभाग के लिए ……भगवती श्यामा : चिताभूमि बना आस्था का केंद्र महाराज रमेश्वर सिंह की चिता पर स्थापित है मां श्यामा की प्रतिमा नवेंदु, दरभंगा . शिव और शक्ति उपासक मिथिला के सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में अवस्थित माता श्यामा शक्तिपीठ के रूप में श्रद्धालुओं के बीच स्थापित हो चुकी हैं. यह उन विरले स्थलों […]

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विज्ञापन विभाग के लिए ……भगवती श्यामा : चिताभूमि बना आस्था का केंद्र महाराज रमेश्वर सिंह की चिता पर स्थापित है मां श्यामा की प्रतिमा नवेंदु, दरभंगा . शिव और शक्ति उपासक मिथिला के सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में अवस्थित माता श्यामा शक्तिपीठ के रूप में श्रद्धालुओं के बीच स्थापित हो चुकी हैं. यह उन विरले स्थलों में से एक है, जहां चिताभूमि पर भगवती की पूजा-आराधना होती है. नेपाल सहित देश के विभिन्न कोनों से लाखों की संख्या में भक्तों का प्रतिवर्ष आगमन इसके महात्म्य को रेखांकित करता है. विदेशों में रहनेवाले श्यामा भक्तों की संख्या भी कम नहीं है. माता की महिमा का ही परिणाम है कि साल-दर-साल भक्तों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है. तंत्र साधना के क्षेत्र में मिथिला प्राचीन काल से ही चर्चित रही है. एक से एक तांत्रिक इस धरा पर हुए. इसमें एक नाम है महाराज रमेश्वर सिंह. ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार महाराज स्वयं बड़े तांत्रिक थे. शक्ति के उपासक महाराज रमेश्वर सिंह के निधनोपरांत उनके पुत्र महाराज कामेश्वर सिंह ने उनकी चिता पर भगवती श्यामा की स्थापना की. तांत्रिक व वैदिक रीति से प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा किया गया. 1933 में संगमरमर पत्थर से निर्मित अभय मुद्रा की यह प्रतिमा आज तक भक्तों को मनवांछित फल का आशीर्वाद दे रही है. माधवेश्वर परिसर के मध्य सरोवर के उत्तर पूर्वाभिमुख इस मंदिर पर हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है. चिताभूमि पर आकर न केवल श्रद्धालुओं का कल्याण सिद्ध होता है, बल्कि इस चिताभूमि पर वैवाहिक संस्कार भी संपन्न होते हैं. आज भी तंत्र साधना की सिद्धि के लिए साधकों का आगमन होता है. राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन जब मां श्यामा मंदिर न्यास समिति का गठन हुआ तबसे उत्तरोत्तर इसका विकास हो रहा है. 1988 में आये प्रलंयकारी भूकंप के पश्चात प्रधान पुजारी पंडित प्रेमानंद झा तथा तत्कालीन प्रबंधक स्व पंडित मधुसूदन झा के सत्प्रेरणा व संकल्प के साथ प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा के लिए नौ दिनी नवाह महायज्ञ का आरंभ हुआ. आरंभ काल में तीन साल के लिए ही इस अनुष्ठान का संकल्प लिया गया था. लेकिन अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होने के कारण आजतक यह अबाध गति से चलता आ रहा है. इस वर्ष गत 30 नवंबर से इस महायज्ञ का आयोजन चल रहा है, जिसका समापन पूर्णाहूति के साथ 9 दिसंबर को हो रहा है. विश्व कल्याणार्थ आशीर्वाद लेने के लिए ममतामयी भगवती के दरबार में भक्तों का तांता लगा है. माता सभी को मंगल आशीष दे रही हैं.

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