भक्ति की कोई उम्र सीमा नहीं : शास्त्री

Updated at :08 Dec 2015 6:50 PM
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भक्ति की कोई उम्र सीमा नहीं : शास्त्री

भक्ति की कोई उम्र सीमा नहीं : शास्त्री श्रीमद् भागवत कथा में काफी संख्या में भाग ले रहे श्रद्धालुफोटो संख्या-15 व 16परिचय- कथावाचन करते वेदानंद शास्त्रीजी महाराज व उपस्थित श्रद्धालुबहादुरपुर . बीएमपी 13 स्थित आदर्श नगर कॉलोनी में श्रीमद् भागवत सप्ताह महायज्ञ के तीसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु जुटे. कोलकाता से आये आचार्य वेदानंद […]

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भक्ति की कोई उम्र सीमा नहीं : शास्त्री श्रीमद् भागवत कथा में काफी संख्या में भाग ले रहे श्रद्धालुफोटो संख्या-15 व 16परिचय- कथावाचन करते वेदानंद शास्त्रीजी महाराज व उपस्थित श्रद्धालुबहादुरपुर . बीएमपी 13 स्थित आदर्श नगर कॉलोनी में श्रीमद् भागवत सप्ताह महायज्ञ के तीसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु जुटे. कोलकाता से आये आचार्य वेदानंद शास्त्री जी ने कहा कि भगवान व्यास ने नारदजी की प्रेरणा से चतु:श्लोकी भगवत का विस्तार 12 स्कन्द, 335 अध्याय में किया. भगवान की उदारता व निश्छल प्रेम के प्रति समर्पण को विदुर के यहां रूखी-सूखी भोजन करने से किया. आचार्य श्री शास्त्री ने कहा शास्वत संबंध सिर्फ भगवान से ही बन सकता है. इसका उदाहरण सती अनुसूईया के निर्मल भक्ति से दिया. व्यासजी ने भागवत के दस लक्षण को भी विस्तार से बताया. इसमें सर्ग, विसर्ग, स्थान, पोषण, उति, मन्वन्तर, ईशानु, निरोध मुक्ति एवं आश्रय ये दस लक्षण हैं. उन्होंने कहा कि भक्ति करने की कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है. क्योंकि छोटी सी उम्र में ही ध्रुवजी को भगवान के दर्शन हुए थे.

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