पूजा-पाठ व कर्मकांड तक ही सीमित नहीं है संस्कृत की पढ़ाई: कुलपति

Updated at :07 Dec 2015 9:22 PM
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पूजा-पाठ व कर्मकांड तक ही सीमित नहीं है संस्कृत की पढ़ाई: कुलपति

पूजा-पाठ व कर्मकांड तक ही सीमित नहीं है संस्कृत की पढ़ाई: कुलपति फोटो संख्या- 23 व 24परिचय- कार्यशाला में संबोधित करते संस्कृत विवि के कुलपति डॉ देवनारायण झा व उपस्थित लोग बेनीपुर : संस्कृत पूजा-पाठ मात्र का विषय नहीं है. संस्कृत के माध्यम से विद्या अर्जन कर कर्मकांडी से लेकर वैज्ञानिक तक बन सकते हैं. […]

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पूजा-पाठ व कर्मकांड तक ही सीमित नहीं है संस्कृत की पढ़ाई: कुलपति फोटो संख्या- 23 व 24परिचय- कार्यशाला में संबोधित करते संस्कृत विवि के कुलपति डॉ देवनारायण झा व उपस्थित लोग बेनीपुर : संस्कृत पूजा-पाठ मात्र का विषय नहीं है. संस्कृत के माध्यम से विद्या अर्जन कर कर्मकांडी से लेकर वैज्ञानिक तक बन सकते हैं. उक्त बातें सोमवार को प्रखंड के हावीभौआर पंचायत पर संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के ज्योतिष विभाग द्वारा यूजीसी से प्रायोजित बाल शिक्षा, वयस्क शिक्षा एवं नारी सशक्तिकरण पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ देवनारायण झा ने कही. इस दौरान उन्होंने संस्कृत शिक्षा का हो रहा ह्रास पर बल देते हुए कहा कि मिथिला की संस्कृति बहुत प्राचीन है. संस्कृत पढ़नेवाले विद्वान होते हैं. वे अपराधी नहीं बन सकते हैं. यह वैदेही, मंडन की भूमि है. फिर भी लोग अपने अतीत को भूल रहे हैं. अतीत को जानने के प्रयास करें, विज्ञान का जितना अभी विकास हो रहा है, वह सब अतीत के संस्कृत से जुड़ा हुआ हे. जो आज विज्ञान के माध्यम से किया जा रहा है. इसका भविष्यवाणी हमारे पूव्रज पूर्व में ही कर चुके हैं. आज आप संस्कृत के पूव्र की अतीत की कल्पना करें. वहीं उन्होंने नारी शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए मिथिला में नारी सदा पूज्य रही है, जिस नारी शिक्षा का आज ढिंढ़ोरा पीटा जा रहा है यह तो अतीत में भी हुआ करता था. नारी वेद पाठ करती थी, नारी ब्रहृमवादिनी होती थी. मातृ देवोभव् यह यहां की संस्कृति से जुड़ा हुआ है. हावीभौआर गेना लाल चौधरी जैसे संस्कृत विद्वानों का जन्मभूमि रहा है. इसलिए आप लोगों से अनुरोध है कि अपने बच्चों को संस्कृत शिक्षा के लिए प्रेरित करें. संस्कृत शिक्षा के उत्थान से ही मिथिला एवं राष्ट्र का उत्थान होगा. इस दौरान गांव के ही पूर्व आरक्षी उप महानिरीक्षक सत्य नारायण झा को कुलपति ने पाग-चादर, माला से सम्मानित किया. विशिष्ट तिथि के रूप में संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक वीर चंद्र राय, धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार झा, संचालक स्नातकोत्तर ज्योतिष विभग के डॉ शिवाकांत झा, के अलावा संस्कृत विद्यालय के डॉ संतोष कुमार झा, कृष्णानंद चौधरी, दिगम्बर झा, हरिनारायण झा, चंद्रनारायण झा, दिलीप साहु, डॉ कुणाल कुमर झा, डॉ गंगेश्वर झा, डॉ हरेंद्र किशोर झा आदि ने उक्त विषयों पर अपना विचार प्रकट करते हुए संस्कृत शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला.

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