खेती-बारी पेज के लिए:::::मृदा दिवस ने दिखाई किसानों को नई राह

Updated at :06 Dec 2015 10:21 PM
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खेती-बारी पेज के लिए:::::मृदा दिवस ने दिखाई किसानों को नई राह

खेती-बारी पेज के लिए:::::मृदा दिवस ने दिखाई किसानों को नई राह \\\\टं३३ी१त्र/र/इ550 किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनकर तैयार/इ/इकार्ड पर अंकित है उर्वरक की मात्रा/इ/इदो पंचायतों की मिट्टी जांच में सामने आयी उर्वरक के प्रयोग की अधिकता/इ/इफोटो.2/इ/इपरिचय. किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देते विधायक जीवेश कुमार/इ/इजाले: /इमृदा दिवस के अवसर पर स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र […]

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खेती-बारी पेज के लिए:::::मृदा दिवस ने दिखाई किसानों को नई राह \\\\टं३३ी१त्र/र/इ550 किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनकर तैयार/इ/इकार्ड पर अंकित है उर्वरक की मात्रा/इ/इदो पंचायतों की मिट्टी जांच में सामने आयी उर्वरक के प्रयोग की अधिकता/इ/इफोटो.2/इ/इपरिचय. किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देते विधायक जीवेश कुमार/इ/इजाले: /इमृदा दिवस के अवसर पर स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने उपस्थित किसानों को नई राह दिखायी. गत 5 दिसम्बर को आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रह्पुर पूर्वी एवं पश्चिमी पंचायत से लायी गयी मिट्टी की जांचोपरान्त मृदा वैज्ञानिक डा़ आनंद प्रसाद राकेश ने बताया कि पश्चिमी पंचायत की मिट्टी में 95 प्रतिशत गंधक, 52़ 4 प्रतिशत पोटाश, 65.़5 प्रतिशत जिंक की कमी है, जब कि पूर्वी पंचायत की मिट्टी में 64 प्रतिशत गंधक, 42.़5 प्रतिशत पोटाश, 30 प्रतिशत जिंक की कमी है़ वहीं पश्चिमी में 65 प्रतिशत फास्फोरस की अधिकता मिल रही है. इसी तरह पूर्वी पंचायत में 47 प्रतिशत फास्फोरस की अधिकता मिली है़ इससे यह स्पस्ट होता है कि पश्चिमी पंचायत के किसान डीएपी का अत्यधिक प्रयोग करते हैं और पूर्वी के किसान मात्रा इनसे थोड़ा ही कम उपयोग करते है़ इस मौके पर नव निर्वाचित भाजपा विधायक जीवेश कुमार ने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य कार्ड बन रहा है, ठीक उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने खेतों के मिट्टी में उचित मात्रा में उर्वरक के प्रयोग के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने पर बल देते हुए मृदा की सुरक्षा के लिए आवाज उठायी़ है. उन्हांेने आगे बताया कि खेतों में अत्यधिक खादों का प्रयोग खेतों के लिए घातक है़ उन्होने पंजाब और महाराष्ट्र के किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के किसान अधिक ऊपज पाने की होड़ में शामिल होकर बेतहाशा खादों का प्रयोग किया करते थे़ परिणामत: आज वहां के किसान मनचाहा ऊपज नहीं मिलने पर आत्महत्या कर रहे हैं. केन्द्र समन्व्यक डा़ अनुपमा के अनुसार 550 किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनकर तैयार है जिनमें स्पस्ट तौर पर उनके खेतों में खादों का निश्चित अनुपात अंकित हैं़

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