\\\\टं३३ी१त्र/ू/रदो तिहाई केंद्र भवन तैयार, नहीं हो रहे शफ्टि

Updated at :06 Dec 2015 10:21 PM
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\\\\टं३३ी१त्र/ू/रदो तिहाई केंद्र भवन तैयार, नहीं हो रहे शफ्टि

\\\\टं३३ी१त्र/ू/रदो तिहाई केंद्र भवन तैयार, नहीं हो रहे शिफ्ट \\\\टं३३ी१त्र/रअधिकांश चल रहे अपने दरवाजा परबेनीपुर : स्थानीय पदाधिकारियों की मिली भगत से प्रखंड के अधिकांश आंगनबाड़ी सेविका नियम के विरुद्ध अपने अपने निजी घरों में केंद्र संचालित कर रही है. यह नजारा 30 नवंबर को टीएचआर वितरण के दौरान दिखा. निजी भवन में केंद्र संचालन […]

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\\\\टं३३ी१त्र/ू/रदो तिहाई केंद्र भवन तैयार, नहीं हो रहे शिफ्ट \\\\टं३३ी१त्र/रअधिकांश चल रहे अपने दरवाजा परबेनीपुर : स्थानीय पदाधिकारियों की मिली भगत से प्रखंड के अधिकांश आंगनबाड़ी सेविका नियम के विरुद्ध अपने अपने निजी घरों में केंद्र संचालित कर रही है. यह नजारा 30 नवंबर को टीएचआर वितरण के दौरान दिखा. निजी भवन में केंद्र संचालन के सवाल पर सेविकाओं ने कहा कि मुफ्त में कौन व्यक्ति अपना दरवाजा बच्चों से गंदगी फैलाने को देगा. चार वर्षार्ेर् से विभाग द्वारा निर्धारित किराया महज दो सौं रुपये भी नहीं मिल रहा है. ऐसी स्थिति में कौन देगा भाड़े पर दरवाजा. सूत्रों की माने तो पूर्व सीडीपीओ पूनम कुमारी के कार्यकाल मेें दो वर्ष का किराया का एकमुस्त भुगतान हुआ और पुन: दो वर्ष का कोषागार से निकासी कर सीडीपीओ के खाते में जमा कर दिया गया, लेकिन आजतक उसका भुगतान नहीं हुआ. इसके बाद गत वर्ष सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के किराया भाड़ा मेंं वृद्धि करने की घोषणा हुई. इस आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 750 एवं शहरी क्षेत्रों में 3000 रुपये देने का प्रावधान किया गया था. लेकिन इस मद में आजतक एक पैसे का भुगतान नहीं हुआ है. 181 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है. जिसमें लगभग दो तिहाई से अधिक केंद्रों का भवन वैसे तैयार भी हो गया है पर दो चार केंंद्र को छोड़ इसी आड़ में वहां की सेविका अपने निजी दरवाजों पर ही केंद्र चला रही है. जबकि सरकारी भवन में कहीं विद्यालय चल रहा है तो कहीं केंद्र. निजी उपयोग मे लाते है. इस संबंध में सीडीपीओ ममता रानी से संपर्क करना चाहा पर मोबाइल से बात नहीं हुई.

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