ट्रॉली अंदर मरीज बाहर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2015 6:53 PM
ट्रॉली अंदर मरीज बाहर मरीज के मौत के बाद भी डीएमसीएच प्रशासन नहीं लिया सबकदरभंगा. डीएमसीएच के गायनिक वार्ड में मरीज बाहर रहते हैं, लेकिन ट्रॉली मैन ट्रॉली को लेकर अंदर जमे रहते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि दूर-दराज से आये गंभीर मरीज पहले एम्बुलेंस में ही रहते हैं. इसके बाद परिजन पुर्जा […]
ट्रॉली अंदर मरीज बाहर मरीज के मौत के बाद भी डीएमसीएच प्रशासन नहीं लिया सबकदरभंगा. डीएमसीएच के गायनिक वार्ड में मरीज बाहर रहते हैं, लेकिन ट्रॉली मैन ट्रॉली को लेकर अंदर जमे रहते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि दूर-दराज से आये गंभीर मरीज पहले एम्बुलेंस में ही रहते हैं. इसके बाद परिजन पुर्जा काउंटर से निबंधन कराते हैं तब ट्रॉली मैन की खोज के लिए गायनिक वार्ड के अंदर बिलबिलाते रहते हैं. अगर किसी कर्मी को दया आ जाती है तो उन्हें अमुक जगह का सलाह देते हैं. तब परिजन ट्रॉली मैन को लेकर पोर्टिको में आते हैं इसके बाद प्रसूता को एंबुलेंस से निकालकर ट्रॉली पर रखा जाता है. 200 गज की दूरी पर लेबर रूम में लेकर प्रसूता को पहुंचते हैं. यह आम दिन की बात हो गयी है. इस घटना से निजात के लिए डीएमसीएच प्रशासन ने सभी ट्रॉली मैन को गायनिक वार्ड के पोर्टिको के पास ट्रॉली लगाकर रहने की सख्त हिदायत दी थी. इसके बावजूद सभी ट्रॉली मैन अंदर में जमे रहते हैैं. मालूम हो कि मई माह में एक प्रसूता ने ट्रॉली मैन के अभाव में पोर्टिंको में ही एक नवजात शिशु को जन्म दी थी. इसे कुछ देर के बाद ही जच्चा-बच्चा की मौत हो गयी थी. इस पर काफी हो हंगामा भी हुआ था. इसी को ध्यान में रखते हुए डीएमसीएच प्रशासन ने ट्रॉली मैन को ट्रॉली ले पोर्टिको में रहने का आदेश दिया था. लेकिन डीएमसीएच प्रशासन के इस आदेश को ट्रॉली मैन धत्ता बता रहे हैं.
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