चना की बुआई का है उपयुक्त समय, 20 से करें गेहूं की बुआई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Nov 2015 6:50 PM
चना की बुआई का है उपयुक्त समय, 20 से करें गेहूं की बुआई मक्का की बुआई का उपयुक्त समय 15 से 20 नवंबर दरभंगा . किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कहा गया है कि चना की बुआई के लिए उपयुक्त समय है. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा-256, केपीजी-59(उदय), केडब्लूआर-108, पूसा 372 अनुशंसित […]
चना की बुआई का है उपयुक्त समय, 20 से करें गेहूं की बुआई मक्का की बुआई का उपयुक्त समय 15 से 20 नवंबर दरभंगा . किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कहा गया है कि चना की बुआई के लिए उपयुक्त समय है. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा-256, केपीजी-59(उदय), केडब्लूआर-108, पूसा 372 अनुशंसित है. बुआई से पूर्व बीज को बेबीस्टीन 2़5 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से उपचारित करें. कजरा पिल्लू से बचाव के लिए क्लोरपाईरीफॉस 8 मिली प्रति किलो ग्राम की दर से 24 घंटा बाद बीज में मिलावें. पुन: 24 घंटे छाया में रखने के बाद राईजोबीयम कल्चर पांच पैकेट प्रति हेक्टेयर की दर से उपचारित करें. बुआई के समय 20 किलो ग्राम नेत्रजन, 45 किलो ग्राम फॉस्फोरस, 20 किलो ग्राम पोटास एवं 20 किलो ग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. बीज की दर प्रति हेक्टेयर 75-80 किलो ग्राम रखें. गेंहूं की बुआई के लिए खेतों की तैयारी शुरु करें. खेत की तैयारी के समय 150-200 क्विंटल कंपोस्ट का प्रयोग करें. बुआई के समय 60 किलो ग्राम नेत्रजन, 60 किलो ग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलो ग्राम पोटास प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. सिंचित एवं समान्य समय पर बुआई के लिए पीबीडब्लू- 343, पीबीडब्लू-443, एचडी-2733, एचडी-2824, के-9107, एचयूडब्लू-206 किस्मों की व्यवस्था करें. किसान 20 नवंबर से गेहूं की बुआई कर सकते हैं.आलू की अनुशंसित प्रभेद की करें बुआई आलू रोप के लिए कुफरी चन्द्रमुखी, कुफरी अशोका, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह, कुफरी लालीमा, कुफरी ज्योति तथा राजेन्द्र आलू-2 आदि अनुशंसित किस्मों की बुआई करें. रोपनी के पहले आलू के कन्द को बैवस्टीन 0़ 01 प्रतिशत (1 से 1़5 ग्राम प्रति लीटर) घोल में उपचारित कर लें. रबी मक्का की बुआई करें. बुआई के लिए संकर किस्में जैसे- शक्तिमान 1, शक्तिमान 2, शक्तिमान 3, शक्तिमान 4, गंगा 11, राजेन्द्र संकर मक्का 1, राजेन्द्र संकर मक्का 2 एवं संकुल किस्में जैसे – देवकी सफेद, लक्ष्मी सफेद, सुआन पीला आदि किस्में इस क्षेत्र के लिए अनुसंशित है. 50 किलो ग्राम नेत्रजन, 75 किलों ग्राम फास्फोरस एवं 50 किलो गा्रम पोटाश, जिंक सल्फेट 25 किलो ग्राम प्रति हेक्टर एवं कम्पोस्ट 100-150 क्विंटल प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें. रबी मक्का की बुआई का उपयुक्त समय 15 से 25 नवम्बर है. मंसूर की बुआई को अविलंब करें पूरा मसूर की बुआई यथाशीघ्र सम्पन्न करने का प्रयास करें. बुआई के लिए किस्में जैसे- अरुण, पंत एल0-406, केएलएस-218,एचयूएल-57 आदि किस्में इस क्षेत्र के लिए अनुसंशित है. बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करें. मटर की बुआई सम्पन्न करने का प्रयास करें. सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. राई-तोरी-सरसों की फसल जो 20 से 25 दिनों की हो गयी है उसमें निकौनी तथा बछनी कर लें.फूलगोभी व पत्ता गोभी वाली फसल में पत्ती खाने वाली कीट (डायमंड बैक मॉथ) की रोकथाम के लिए स्पेनोसेड दवा एक मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. धान की कटनी तथा दौनी के कार्य को उच्च प्राथमिकता दे कर पूरा करने का प्रयास करें.
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