पुराने किले पर फिर से राजद का कब्जा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Nov 2015 6:44 PM
पुराने किले पर फिर से राजद का कब्जा मिथिला के गढ़ में फिर हासिल किया जनाधारपार्टी कार्यकर्त्ताओं को मिली नयी संजीवनीदरभंगा: विधान सभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से पूरे प्रदेश के साथ ही मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मशहूर दरभंगा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण था. 2010 में हुए पिछले विधान सभा चुनाव में […]
पुराने किले पर फिर से राजद का कब्जा मिथिला के गढ़ में फिर हासिल किया जनाधारपार्टी कार्यकर्त्ताओं को मिली नयी संजीवनीदरभंगा: विधान सभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से पूरे प्रदेश के साथ ही मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मशहूर दरभंगा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण था. 2010 में हुए पिछले विधान सभा चुनाव में इस जिला से खासकर राजद का जनाधार लगभग दरक गया था. दस में से मात्र दो सीटों पर ही राजद को जीत हासिल हो सकी. आसन्न विस चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर से अपने पुराने किले पर कब्जा हासिल कर लिया. इसने पार्टी कार्यकर्त्ताओं को नई ऊर्जा प्रदान की है. वैसे तो 2009 में हुए लोकसभा चुनाव से ही राजग ने राजद के अभेद्य किले के रूप में स्थापित इस जिले में सेंधमारी कर दी. दरभंगा के अलावा मधुबनी से जीत हासिल कर ली. इसके बाद तत्कालीन राजग (भाजपा-जदयू) के नेतृत्व में हुए विधान सभा चुनाव में राजद का किला ढह गया. आठ सीटों पर एनडीए जीत गयी. इसमें भाजपा का प्रदर्शन सबसे बेहतरीन रहा. शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करते हुए बीजेपी ने छह में से छह सीट पर अपना झंडा बुलंद किया. इसके बाद राजद कार्यकर्त्ता सुस्त से पड़ गये. कहीं भी इनकी उल्लेखनीय गतिविधि नहीं दिख रही थी. नरेंद्र मोदी की लहर में भी सांसद कीर्त्ति आजाद की जीत के प्रति राजद कार्यकर्त्ता आश्वस्त नहीं थे, लेकिन उनके विरोधी श्री आजाद अच्छे अंतर से विजयी हो गये. राजनीतिक दृष्टि से मिथिला का यह क्षेत्र काफी संवेदनशील रहा है. प्रदेश स्तर के नेताओं की भूमि रहने के कारण भी इसकी जागरूकता अधिक रही है. यही वजह है कि यहां से चुने गये कई जनप्रतिनिधि मंत्री तक रहे. प्रमुख राजीनितक दलों की नजर इस क्षेत्र पर रहती है. प्रदेश व देश की राजनीति में इस क्षेत्र की दखल रही है. यही कारण है कि सूबे में जब नया राजनीतिक समीकरण बना तो इसका असर इस इलाके पर भी स्पष्ट पड़ा. राजद के साथ जदयू के आते ही वोट के नये समीकरण बन गये. राजद कार्यकर्त्ताओं में जोश का नया संचार हुआ और पार्टी ने अपने पुराने किले पर फिर से अपना झंडा बुलंद कर लिया. निश्चत तौर पर क्षेत्र की राजनीति पर आनेवाले समय में महागंठबंधन की यह जीत प्रभावी असर डालेगा.
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