277 प्राथमिक वद्यिालयों को कब नसीब होगा अपना छत
277 प्राथमिक विद्यालयों को कब नसीब होगा अपना छत पांच साल से भूमि के अभाव में नहीं बन रहा स्कूलों का भवनपेड़ के छांव तले पढ़ने को मजबूर हैं 50 हजार बच्चे दरभंगा. जिले के 277 नवसृजत प्राथमिक विद्यालयों को पांच वर्ष बीतने के बावजूद अपनी भूमि एवं भवन नहीं है. ये विद्यालय गांव के […]
277 प्राथमिक विद्यालयों को कब नसीब होगा अपना छत पांच साल से भूमि के अभाव में नहीं बन रहा स्कूलों का भवनपेड़ के छांव तले पढ़ने को मजबूर हैं 50 हजार बच्चे दरभंगा. जिले के 277 नवसृजत प्राथमिक विद्यालयों को पांच वर्ष बीतने के बावजूद अपनी भूमि एवं भवन नहीं है. ये विद्यालय गांव के टोलों व कस्बों के पेड़ तले चल रहे हैं. इन विद्यालयों में नामांकित करीब 50 हजार बच्चों को बिना ब्लैकबोर्ड के जमीन पर बैठने की मजबूरी बनी हुई है. इन नौनिहालों को किस प्रकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही होगी, इसपर पांच वर्षों में भी किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया. सरकारी महकमा कागजी खानापूरी कर विभाग को जमीन नहीं मिलने की विवशता के आधार पर संचिकाओं को दौड़ा रहा है, किंतु इन बच्चों के परिवार की दशा-दिशा क्या निर्धारित हो रहा है, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं होगा. इन परिवारों के नन्हें-मुन्नों से बड़ी आशाएं होगी, किंतु इन आशाओं पर किस प्रकार की नींव तैयार हो रहा है, यह उन गरीब एवं अनपढ़ परिवार को आज एहसास नहीं है. किंतु उस इलाके के ठेकेदार इसके प्रति गंभीर नहीं हैं. यह चिंता का विषय है. यही लोग जब मतदान के समय वोट की गोलबंदी पर उतरते हैं उस वक्त मतदाताओं को पूछना जरूरी है कि पांच वर्षों में भी इन विद्यालयों के जमीन क्यों नहीं मिला? ऐसा भी नहीं है कि इन स्कूलों के भवन एवं संसाधन के लिए राशि की कमी है. केवल इच्छाशक्ति की कमी है, जिसके कारण इन विद्यालयों को जमीन नहीं मिल पा रही है. बतातें चले कि शिक्षा के अधिकार के तहत प्रत्येक बसाव क्षेत्र तक प्राथमिक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए वर्षवार नये प्राथमिक विद्यालय खुलते चले गये. कुछ विद्यालयों को जमीन मिली, भवन बने. आज इन विद्यालयों के बच्चों को अपना वर्ग कक्ष एवं संसाधन है किंतु जिले के 277 नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों को पांच वर्ष बीतने के बावजूद भूमि नहीं मिल पायी. जिसके कारण कहीं पेड़ तले तो कहीं किसी के दरवाजे पर इन विद्यालयों को चलाने की मजबूरी है. जब अत्यधिक गर्मी, बरसात आदि जैसे विषम परिस्थिति बनते हैं, ये विद्यालय अघोषित रूप से बंद पड़ जाते हैं. वहीं बच्चों को जमीन पर बैठने की मजबूरी उन्हें मानसिक रूप से कुंठित करता है. ऐसा भी नहीं है कि इनके बसाव क्षेत्र में कोई सरकारी जमीन अथवा जमीन नहीं मिलने की आशाएं हैं, किंतु इसे सरकारी प्रयास के भरोसे छोड़ने की वजह से ऐसी स्थिति बनी हुई है. पूरे जिले के सभी प्रखंडों में ऐसे विद्यालय हैं जिसमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को गुणवत्ताहीन शिक्षा की मजबूरी बनी हुई है. इसपर कब जनप्रतिनिधियों का ध्यान जायेगा, इसका इंतजार है. बॉक्स::::::::::::::::::प्रखंडवार भूमिहीन व भवनहीन विद्यालयों की स्थिति प्रखंड का नाम भवनहीन विद्यालयों की संख्याअलीनगर 12बहादुरपुर 31बहेड़ी 17बेनीपुर 13बिरौल 26सदर 16गौड़ाबौराम 02घनश्यामपुर 14हनुमाननगर 05हायाघाट 21केवटी 17कुशेश्वरस्थान 18कुशेश्वरस्थान पूर्वी 01मनीगाछी 19सिंहवाड़ा 08तारडीह 13किरतपुर 11शहर में भी 27 भवनहीन विद्यालयऐसा नहीं है कि यह स्थिति सुदूर देहातों की है, बल्कि शहर के 27 प्राथमिक व मध्य विद्यालय भी वर्षों से भवनहीन हैं. प्राथमिक विद्यालय जुड़ावन सिंह, मवि जुड़ावन सिंह, मवि कोतवाली चौक आदि विद्यालय दूसरे विद्यालय में येन-केन प्रकारेण टैग होकर चल रहे हैं.
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