डाक्टरों के हस्तक्षेप से टला डीएमसीएच में हंगामा

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मरीजों को नहीं लगायेंगे आक्सीजन पाइप क्या बेड उठायेंगे अस्पताल अधीक्षक दरभंगा. डीएमसीएच की व्यवस्था गड़बड़ा गयी है. कोई किसी की नहीं सुनता. कर्मी भी बेलगाम है. ऐसी वाकया गुरुवार को आधा दर्जन बार घटी. ऐसे मामले मरीजो के उपचार, ऑक्सीजन सिलिंडर उठाने, मरीजों को ऑक्सीजन लगाने से संबंधित है. यह एक दिन की समस्याएं […]

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मरीजों को नहीं लगायेंगे आक्सीजन पाइप
क्या बेड उठायेंगे अस्पताल अधीक्षक
दरभंगा. डीएमसीएच की व्यवस्था गड़बड़ा गयी है. कोई किसी की नहीं सुनता. कर्मी भी बेलगाम है. ऐसी वाकया गुरुवार को आधा दर्जन बार घटी. ऐसे मामले मरीजो के उपचार, ऑक्सीजन सिलिंडर उठाने, मरीजों को ऑक्सीजन लगाने से संबंधित है. यह एक दिन की समस्याएं नहीं है. ऐसी घटनाएं यहां रोज होती है.
इमरजेंसी वार्ड में हंगामा: इमरजेंसी वार्ड के मुख्य गेट पर पुलिस नहीं थी. एनजीओ के दो गार्ड इस वार्ड में तैनात थे. गेट पर आवाजाही बेरोकटोक जारी थी. मरीजों की संख्या मात्र 11 थी, लेकिन इसके लिए तीन दर्जन से ज्यादा उनके परिजन ओटी और परिक्षण कक्ष में घुसे हुए थे. वहीं एक मरीज के तीन परिजनों ने मरीज के नहीं देखने पर शोर मचा रहे थे.
गार्ड के हटाते ही मरीजे के परिजन गार्ड से उलझ गये. बात तुम ताम पर पहुंच गयी. इसी बीच यूनिट इंचार्ज सह मेडिसीन विभागाध्यक्ष डा. बीके सिंह वहां पहुंचे. परीक्षण कक्ष में मरीजों सहित उनके परिजनों की भीड़ से कमरा भरा पड़ा था. झगड़ा टालने के लिए उन्होंने उनके मरीज की जांच पड़ताल की. इसी बीच इस वार्ड के पीओडी चैम्बर में बैठे प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डा. बालेश्वर सागर भी वहां पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने मामला शांत कराया. वहीं विभागाध्यक्ष डा. सिंह ने सिस्टर इंचार्ज को परीक्षण ट्रॉली मुहैया कराने को कहा लेकिन उन्होंने एक न सुनीं.
आक्सीजन का नहीं लगायेंगे पाइप: प्रभारी प्राचार्य सह मेडिसीन विभाग के अध्यक्ष डा. बीके सिंह प्राचार्य चैम्बर में कॉलेज का दैनिक कार्य निपटा रहे थे. उनके मोबाइल पर एक डाक्टर का फोन आया.
इस पर डा. सिंह ने कहा कि कौन है वह कर्मी जो मरीज के नाक में ऑक्सीजन पाइप लगाने से इंकार कर रहा है. वहीं कर्मी डा. सिंह को फोन से पाइप नहीं लगाने की सूचना दी. डा. बीके सिंह ने बताया कि ऐसे में कैसे काम चलेगा. प्रभारी अस्पताल अधीक्षक सह अस्पताल उपाधीक्षक अपने चैम्बर में दैनिक कार्य निपटा रहे थे.
इसी दौरान उनके मोबाइल पर अस्पताल के एक कर्मी का फोन आया. सर नया बेड वाहन पर लादने वाला कोई नहीं है. उन्होंने किसी अन्य कर्मी से सहयोग लेने की बात कही. लेकिन मनोरोग वार्ड से मोबाइल से बार बार यह संदेश आ रहा था. प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डा. बालेश्वर सागर ने कर्मी को मोबाइल पर कहा कि अस्पताल उपाधीक्षक बेड को वाहन पर लादने आ रहे है. इस पर खीझते हुए डा. सागर ने बताया कि कोई भी जबावदेही लेना नहीं चाहता.
गैस लगाने के लिए एम्बुलेंंस दीजिए: प्रभारी अस्पताल अधीक्षक अपने चैम्बर में थे. मेडिसीन वार्ड का एककर्मी चैम्बर में आया. कर्मी ने प्रभारी अस्पताल अधीक्षक से दो ऑक्सीजन सिलिंडर ले जाने के लिए एम्बुलंेंस की मांग की.
डा. सागर ने कहा कि दोनों गैस सिलिंडर साइकिल से ले जायें. लेकिन कर्मी वाहन के जिद पर अड़ा रहा. उपाधीक्षक डा. सागर विफर गये. कर्मी चैम्बर से फरार हो गया. डीएमसीएच का एम्बुलेंंस मरीजों के काम नहीं आता है. एम्बुलेंस का उपयोग वार्डों में दवा समेत कई सामग्री स्टोर में ले जाने में किया जाता है. स्टोर से दवा, कागजात सहित कई सामग्री उसपर लदे थे.
इसी बीच एम्बुलंेस पर लदी सामग्री मेडिसीन वार्ड पहुंचा. दो कर्मी उससे दवाओं के कार्टन व अन्य सामग्री अनलोड कर वार्ड में रख रहे थे. यह देख आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. ऐसी दुर्गती इस व्यवस्था की है तो मरीजों का इलाज कैसे संभव होगा.
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