प्रेम व भक्ति के बल पर प्रभु की प्राप्ति संभव

Updated at : 11 Jul 2019 1:06 AM (IST)
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प्रेम व भक्ति के बल पर प्रभु की प्राप्ति संभव

दरभंगा : अंत:करण के चार भेद माने गये हैं मन, बुद्धि, चित एवं अहंकार. विचार का संकल्प विकल्प मन को माना गया है. निर्णय ही मानव मात्र की बुद्धि है. अहंभाव को अहंकार की संज्ञा दी गयी है. परामात्मा तत्व का चिन्ता ही चित्र समझें. यह बातें आचार्य हेमचन्द्र ठाकुर ने बुधवार को श्यामा धाम […]

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दरभंगा : अंत:करण के चार भेद माने गये हैं मन, बुद्धि, चित एवं अहंकार. विचार का संकल्प विकल्प मन को माना गया है. निर्णय ही मानव मात्र की बुद्धि है. अहंभाव को अहंकार की संज्ञा दी गयी है. परामात्मा तत्व का चिन्ता ही चित्र समझें. यह बातें आचार्य हेमचन्द्र ठाकुर ने बुधवार को श्यामा धाम परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कही.

बताया कि श्रीराम ने वनवास में भी सत्संग का साथ नहीं छोड़ा. चित्रकुट पर्वत को अपने आवासीय स्थल के रुप में चयनित किया. चित ही चित्रकुट कहलाता है, जहां मन्दाकिनी बहती है. श्री ठाकुर ने कहा कि श्रीराम प्रेम के अधीन हैं. बताया कि प्रेम व भक्ति के बल पर ही भक्त भगवान को प्राप्त कर सकते हैं.

इससे पूर्व आषाढ़ी नवरात्र के आठवें दिन मां श्यामा की विशेष पूजा अर्चना पुजारी पं. शरद कुमार झा ने की. पं. मिथिलेश मिश्र व मनोहर झा ने श्रीरामचरित मानस एवं दूर्गा सप्तशती का पाठ किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ चौधरी हेमचंद्र राय ने किया. मौके पर दिलिप कुमार, प्रदीप कुमार, अमर प्रकाश, धर्मशीला देवी, रामनाथ झा, प्रकाश पासवान, राम नरेश चौधरी आदि मौजूद थे.

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