दरभंगा में पहली बार किसान ने उपजाया काला गेहूं
Updated at : 19 Apr 2019 1:13 AM (IST)
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बहादुरपुर (दरभंगा) : जिले में पहली बार एक किसान ने गेहूं की नयी प्रजाति काले गेहूं की खेती की है. काला गेहूं स्वास्थ्य व अच्छी उपज दोनों मामले में उत्तम बताया जाता है. नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी संस्था के सहयोग से पहले से अधिक बेहतर व स्वास्थ्यवर्धक गेहूं की किस्म एनएबीआई के उत्पादन का यहां […]
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बहादुरपुर (दरभंगा) : जिले में पहली बार एक किसान ने गेहूं की नयी प्रजाति काले गेहूं की खेती की है. काला गेहूं स्वास्थ्य व अच्छी उपज दोनों मामले में उत्तम बताया जाता है. नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी संस्था के सहयोग से पहले से अधिक बेहतर व स्वास्थ्यवर्धक गेहूं की किस्म एनएबीआई के उत्पादन का यहां प्रयोग सफल रहा. बहेड़ी प्रखंड के जखड़ा गांव निवासी रामकुमार सिंह के पुत्र मुकेश कुमार सिंह ने प्रयोग के तौर पर इसका उत्पादन किया है.
श्री सिंह ने बताया कि गेहूं का काला रंग इसमें उच्च मात्रा में पाये जाने वाले एंथोसाइनिन की वजह से है. इसमें जिंक व आयरन की अधिक मात्रा पायी जाती है. काले गेहूं का बीज अनुसंधान केंद्र से ऑनलाइन मंगवाया गया. दो कट्ठा जमीन में इसकी बुआई की गयी. 140 किलोग्राम गेहूं का उत्पादन हुआ. किसान श्री सिंह ने बुआई से अन्न प्राप्ति तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी डीएओ समीर कुमार को दी है.
गुणवक्ता के मामले में ब्लू वेयरिज फल के बराबर. साधारण गेहूं में एक ओर जहां एंथोसाइनिन की मात्रा पांच से 15 पीपीएम की होती है. वहीं, ब्लैक गेहूं में यह मात्रा 40 से 140 पीपीएम की है. गेहूं का भोजन में उपयोग शरीर से फ्री रेडिकल्स बाहर निकालने में सहायता प्रदान करता है. एंटी ऑक्सीडेंट की अधिकता की वजह से साधारण गेहूं के मुकाबले काले गेहू काफी पौष्टिक होता है. गुणवक्ता के मामले में इसे ब्लू वेयरिज नामक फल के बराबर माना जाता है. काले रंग के अतिरिक्त जामुनी व नीले रंग में भी इसे उपजाया जायेगा.
नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी ने किया विकसित. शोध में पता चला है कि तनाव से पीड़ित व्यक्ति पर इसका प्रभाव काफी सकारात्मक आया है. मोटापा को कंट्रोल करने में भी उत्साहजनक परिणाम मिला है. अन्न की कीमत व स्वास्थ्य के फायदे की दृष्टि से इसे भविष्य की खेती बताया जा रहा है. घाटे का सौदा बन चुकी पारंपरिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह खुशी की खबर हो सकती है. जानकारी के अनुसार मोहाली सेक्टर 81 स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी ने डॉ मोनिका गर्ग के नेतृत्व में एंटीऑक्सीडेंट से परिपूर्ण गेहूं की इस नयी किस्म को विकसित किया है. संस्था ने इसका पेटेंट भी करा लिया है. डॉ मोनिका के नेतृत्व में इस प्रजाति पर 2010 से अनुसंधान किया जा रहा था. संस्था की ओर से ब्लैक गेहूं की इस नई प्रजाति को “नाबी एमजी” नाम दिया गया है.
कैंसर, मधुमेह व हृदय रोग में लाभदायक. इस गेहूं का उपयोग कैंसर रोगियों के लिए सकारात्मक डायट के रूप में सफल पाया गया है. भोजन के तौर पर यह बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है. वहीं डायबिटीज रोगियों में काले गेहूं के उपयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं. साथ ही हृदय रोगियों पर किये शोध में भी काला गेहूं का सार्थक परिणाम मिला है.
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