दाने की तरह बिखर गये किसानों के अरमान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Apr 2019 1:21 AM (IST)
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गेहूं के साथ सब्जी, पशुचारा व आम-लीची को भारी नुकसान कमतौल : बेमौसम की बरसात व ओलावृष्टि से गेहूं ही नहीं, सब्जी, पशुचारा, आम-लीची आदि की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. सर्वाधिक परेशानी उन किसानों को हुई है, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी. अब उन्हें उम्मीद के अनुसार फसल खलिहान में पहुंचने का […]
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गेहूं के साथ सब्जी, पशुचारा व आम-लीची को भारी नुकसान
कमतौल : बेमौसम की बरसात व ओलावृष्टि से गेहूं ही नहीं, सब्जी, पशुचारा, आम-लीची आदि की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. सर्वाधिक परेशानी उन किसानों को हुई है, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी. अब उन्हें उम्मीद के अनुसार फसल खलिहान में पहुंचने का भरोसा नहीं है. गेंहूं की कटनी कर थ्रेसिंग की योजना बना रहे किसानों पर यह प्राकृतिक प्रकोप वज्रपात के समान है.
मंगलवार को ओलावृष्टि से गेहूं की न सिर्फ बालियां एवं दाने खेतों में बिखर गये, बल्कि पौधे भी धराशायी हो गए हैं, जिनकी कटनी नहीं हो सकती. परेशानियों के बावजूद कटनी हो भी गयी तो पशुचारे की समस्या के ही उपयोग में यह आ सकेगा. अन्नदाता के दो जून रोटी का जुगाड़ नहीं हो पायेगा. ऐसे में लिए गए कर्ज को चुकता करना वैसे किसानों के लिए मुश्किल ही नहीं असंभव होगा, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी.
मंगलवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि से कहीं कम तो कहीं ज्यादा नुकसान होने की बात कही जा रही है. अहियारी उत्तरी के मिर्ज़ापुर, चनुआटोल, टारा, अहियारी दक्षिणी पंचायत के भोजपुर, पचभिंडा, अलियाडीह, पकवाही, दैवा, भरारी, वरकुरवा आदि चौर में खेती करने वाले किसानों को भारी तबाही हुई है. मंगलवार को हुई बारिश का पानी अधिकांश खेतों से बुधवार को भी नहीं निकल सका था. किसान राम दहिन यादव ने बताया कि अधिकांश गेहूं के खेत में पानी लगा है.
मेड़ काटने के बाद भी पानी नहीं निकल रहा. कटनी के बाद खेत में पड़ी फसल तो बर्बाद हो ही गया है. खड़ी फसल से भी दाने निकलेंगे, आशा नहीं की जा सकती है. वहीं अरुण राय ने बताया कि एक-दो दिन के अंतराल पर पानी हो जा रहा है. धूप निकलने पर सूखता है, फिर पानी बरस जाता है. ऐसे में भारी बारिश से खेतों में पानी भर गया है. एक सप्ताह कड़ी धूप निकलने के बाद ही कुछ सोचा जाएगा. गेंहूं की फसलों से दाने निकलेंगे, उम्मीद नहीं है.
इधर नकदी एवं मौसमी फसल मसलन आम एवं लीची को भी भारी नुकसान पहुंचा है. आम के टिकोले या तो झर गये हैं या फिर चोटिल हो गये हैं. इससे उत्पादन पर असर पड़ना तय है. वहीं खेतों में लगी सब्जियों और पशुचारे की फसलें भी ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है. उनके सारे पत्ते झर गये हैं. सब्जी की फसलों के पत्ते झर जाने से पौधे का पोषण नहीं हो पायेगा.
इस कारण फलियां निकलने में समय लगेगा. वहीं डंठल खाने से पशुओं का भी भरपूर पोषण नहीं हो पायेगा, जिससे दूध उत्पादन पर असर पड़ेगा. सब्जी उत्पादक किसान भोगेन्द्र महतो, इंद्र नाथ महतो, बिजाई महतो, संजय महतो, सुखदेव महतो सहित कई किसानों ने बताया कि खेतों में जाने पर कलेजा मुंह को आता है. सिर्फ ततैला में गेंहू सहित सब्जी उत्पादक किसानों को लाखों रूपये की क्षति हुई है.
इस संबंध में कृषि समन्वयक जयशंकर ठाकुर ने बताया कि ओलावृष्टि से कई क्षेत्रों में भारी तबाही देखने को मिल रही है. बारिश थमने के बाद नुकसान का आकलन करने में किसान सलाहकार जुटे हैं. रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है. बुधवार को ततैला में गेंहूं और सब्जी की खेती के नुकसान का जायजा लिया गया है. लाखों के नुकसान का अनुमान है. वहीं अहियारी उत्तरी के मिर्ज़ापुर में किसान सलाहकार राजीव कुमार और अन्य पंचायतों के किसान सलाहकार भी नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं.
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