खातों में क रोड़ों पर आवंटन नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Jul 2015 7:46 AM (IST)
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लापरवाही : गेहूं और मसूर फसल क्षति मुआवजे का मामला गेहूं व मसूर की फसल क्षति के मुआवजे को लेकर चंपारण किसानों के खाते में नेताओं और अफसरों की सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही पहुंची है. असल में उनके बैंक खाते अभी भी मुआवजे की राशि से सूने हैं और किसान मुआवजे को लेकर प्रशासन और […]
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लापरवाही : गेहूं और मसूर फसल क्षति मुआवजे का मामला
गेहूं व मसूर की फसल क्षति के मुआवजे को लेकर चंपारण किसानों के खाते में नेताओं और अफसरों की सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही पहुंची है. असल में उनके बैंक खाते अभी भी मुआवजे की राशि से सूने हैं और किसान मुआवजे को लेकर प्रशासन और बैंक के बीच का फुटबॉल बना हुआ है.
वह भी तब जब खाते में करोड़ों रुपया डंप पड़ा हुआ है और 16 हजार किसान दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं. ‘प्रभात खबर’ के पड़ताल की रिपोर्ट
बेतिया : खरीफ के फसल बोने का समय गुजरने को है. सूद और कर्ज लेकर किसानों ने धान की रोपायी तो कर दी है, पर अब सिंचाई और खाद के लिए किसानों के हाथ तंग है. एक भी पूंजी बची नहीं है.
कारण की गेहूं और मसूर का फसल बरबाद हो चुका था. लिहाजा बाजार में बेचने की नौबत तक नहीं आयी. किसान इस उम्मीद में थे कि मुआवजे की राशि मिलेगी तो खरीफ के फसल की बोआई में कुछ मदद मिलेगा. लेकिन अभी तक किसानों को उनके मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी है. यह हाल तब है जब सरकार ने फसल क्षति का मुआवजा चार माह पहले ही आवंटित कर दिया है. लेकिन अफसर व कर्मी इसे बांटने में नाकाम साबित हो रहे हैं.
बैंक व प्रशासन में फंसा पेच
किसानों के फसल अनुदान को लेकर प्रखंड प्रशासन और बैंक के बीच पेंच फस गया है. प्रखंड प्रशासन का कहना है कि उसने राशि बैंक को भेज दी है. वह किसानों के खाते में नहीं भेज रहा है. जबकि बैंक का तर्क है कि प्रखंड की ओर से दिये गये किसानों के बैंक विवरण में खामियां हैं. इससे पैसा नहीं भेजा जा पा रहा है. इधर, किसान प्रखंड और बैंक का चक्कर लगा रहे हैं.
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