नरकंकाल व चंदेश्वर के माता-पिता का नहीं मैच कर रहा डीएनए

Published at :17 Jun 2015 8:34 AM (IST)
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नरकंकाल व चंदेश्वर के माता-पिता का नहीं मैच कर रहा डीएनए

बगहा : जिले के नौरंगिया थाने के छोटका भपसा नदी से विगत 24 नवंबर 2013 को बरामद कंकाल चंदेश्वर के नहीं थे. पहले तो उस कंकाल की जांच, इस बात को लेकर हुई कि वास्तव में यह कंकाल मानव के है या किसी जानवर के. चूंकि जंगली इलाका है, यहां जानवरों के कंकाल की अधिक […]

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बगहा : जिले के नौरंगिया थाने के छोटका भपसा नदी से विगत 24 नवंबर 2013 को बरामद कंकाल चंदेश्वर के नहीं थे. पहले तो उस कंकाल की जांच, इस बात को लेकर हुई कि वास्तव में यह कंकाल मानव के है या किसी जानवर के. चूंकि जंगली इलाका है, यहां जानवरों के कंकाल की अधिक संभावना थी. इसको लेकर पुलिस ने कंकाल की फोरेंसिक जांच करायी तो पता चला कि बरामद की गयी हड्डियां वास्तव में किसी आदमी के ही है. लेकिन वह चंदेश्वर के नहीं है, इस बात का खुलासा हो गया है.
एसपी शफीउल हक ने बताया कि फोरेंसिक जांच एवं डीएनए का रिपोर्ट आ गयी है, नर कंकाल और चंदेश्वर के माता-पिता का डीएनए मैच नहीं कर रहा है. एसपी ने बताया कि पहले चंदेश्वर के पिता रामनारायण का डीएनए कराया गया. वह नर कंकाल से मैच नहीं किया. उसके बाद 8 अक्टूबर 2014 को चंदेश्वर की मां मीना देवी का ब्लड सैंपल लिया गया और उसे सीडीएफडी हैदराबाद टेस्ट के लिए भेजा गया. वहां से रिपोर्ट आयी है. उस आधार पर स्पष्ट है कि कंकाल चंदेश्वर के नहीं थे. ऐसे में एक बार फिर चंदेश्वर के जिंदा होने की संभावना बन गयी है. पुलिस तो उस वक्त तक चंदेश्वर को जीवित मानेगी, जब तक उसके शव की बरामदगी नहीं हो जाती.
किसका है कंकाल
नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेड़वा गांव के समीप भपसा नदी से बरामद कंकाल की पड़ताल पुलिस कर रही है. हालांकि पुलिस के अधिकारियों को भी ऐसा लग रहा था कि हो सकता है वह कंकाल चंदेश्वर के ही हों. लेकिन जब तक उसकी प्रमाणिकता की रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं था. लेकिन अब जब रिपोर्ट आया है तो एक नयी कहानी सामने आयी है, आखिर भपसा नदी से बरामद नर कंकाल किसके हैं.
पुलिस इस मामले की जांच में भी जुटी है. एसपी ने कांड के अनुसंधानकर्ता को बरामद नर कंकाल के बारे में भी जांच पड़ताल करने का आदेश दिया है.
कंकाल का एक पैर सुरक्षित
चंदेश्वर के घर में कंकाल का एक पैर अभी भी सुरक्षित है. शायद उसके घर वालों को यह पता नहीं है कि जिस कंकाल को वह चंदेश्वर मान कर घर में सुरक्षित रखा है, वह कंकाल उसके पुत्र का नहींहै. डीएनए रिपोर्ट आने के बारे में चंदेश्वर के पिता रामनारायण काजी को कोई जानकारी नहीं है.
उनका कहना है कि मै तो थाने का चक्कर लगाता हीं रहता हूं. लेकिन पुलिस वाले मुङो कोई जानकारी नहीं देते. उल्लेखनीय है कि जब कंकाल की बरामदगी हुई थी तो उस वक्त चंदेश्वर के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से आरजू मिन्नत कर कंकाल के एक पैर को अपने घर ले गये थे. उन लोगों का कहना था कि जब रिपोर्ट आ जायेगा तो इसका अंतिम संस्कार करेंगे.
कब तक होगी चंदेश्वर की तलाश
कब तक चंदेश्वर के जिंदा या मुर्दा होने की तलाश होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता. कब तक चंदेश्वर के घर वाले इस इंतजार में उसका श्रद्ध कर्म भी नहीं करेंगे, कि पुलिस खोज कर लायेगी. पुलिस के अधिकारी भी इस पर कुछ ठोस जवाब नहीं दे रहे हैं. याद हो गया 24 नवंबर 2013 को नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेड़वा के समीप भपसा नदी में मछुअरे मछली मार रहे थे.
तभी मछुआरों के जाल में कंकाल का माथा आ गया था . मछुआरों ने कंकाल के सर को गन्ना के खेत में फेंक दिया और वे भाग गये. बाद में स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस गयी थी और वहां से कंकाल की बरामदगी हुई थी. पर, डीएनए रिपोर्ट मैच नहीं करने के बाद पुलिस वाले भी काफी परेशान हैं.
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