मोतिहारी, सीतामढ़ी व लखनऊ जेल में रह चुका है शमीम

Updated at : 02 Dec 2016 5:18 AM (IST)
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मोतिहारी, सीतामढ़ी व लखनऊ जेल में रह चुका है शमीम

रक्सौल : अशमीम को कई कांडों में भारतीय पुलिस तलाश कर रही है और उसकी गुनाहों की फेहरिस्त लंबी है. लेकिन अब तक वह भारत के तीन जेलों की यात्रा कर चुका है. सीतामढ़ी जिला के बैरगनिया थाना के एक मामले में शमीम 2002 से 2008 तक सीतामढ़ी जेल में रह चुका है तो पूर्वी […]

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रक्सौल : अशमीम को कई कांडों में भारतीय पुलिस तलाश कर रही है और उसकी गुनाहों की फेहरिस्त लंबी है. लेकिन अब तक वह भारत के तीन जेलों की यात्रा कर चुका है. सीतामढ़ी जिला के बैरगनिया थाना के एक मामले में शमीम 2002 से 2008 तक सीतामढ़ी जेल में रह चुका है तो पूर्वी चंपारण के मेहसी थाना कांड संख्या 50/14 में शमीम मोतिहारी जेल में बंद था.

इतना हीं नहीं शमीम उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित लखनउ जेल में आठ माह तक रह चुका है. उस पर मुख्य रूप से मोतिहारी टाउन, बैरगनिया, फेनहारा, मेहसी, लखनउ व हरदोई थाना में मामला दर्ज है और लगभग आधा दर्जन थानों की पुलिस उसे खोज रही थी. अब जबकि उसकी गिरफ्तारी नेपाल पुलिस द्वारा की गयी तो भारतीय पुलिस को यह इंतजार था कि शमीम भारत आयेगा. लेकिन नेपाल पुलिस ने इसमें अड़ंगा लगा दिया.

सूत्रों की माने तो शमीम जब गिरफ्तार हुआ तो उसके पास ब्राउन सुगर नहीं था. लेकिन नेपाल पुलिस के ही एक जवान ने स्मैक रखकर उसके भारत आने का रास्ता बंद कर दिया. नेपाल पुलिस सूत्रों की माने तो शमीम की गिरफ्तारी विजय यादव नामक इंस्पेक्टर की टीम ने की थी. लेकिन स्मैक रखने व नहीं रखने के विवाद में विजय यादव की टीम को उपलब्धि से अलग किया गया. पिछले कुछ वर्षों से भारत और नेपाल पुलिस के संबंध बेहतर थे और दोनों तरफ से अपराधियों को गिरफ्तार कर एक-दूसरे के हवाले किया जाता रहा है. हाल ही में केडिया अपहरण कांड के दौरान मोतिहारी और बेतिया के एसपी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर उनकी रिहाई करायी थी तो वीरगंज के दो पुलिस जवानों को स्मैक के साथ पकड़े जाने के बाद रक्सौल पुलिस ने छोड़ दिया था.
लेकिन शमीम की गिरफ्तारी के बाद पूर्वी चंपारण व नेपाल पुलिस के संबंध बिगड़ गये हैं. ऐसी चर्चा है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम करनेवाला दिलशाद को बिना वजह नेपाल पुलिस द्वारा एनकाउंटर कर दिया गया. दिलशाद पर नेपाल में एक भी कांड दर्ज नहीं थे. रिश्ते में गिरावट दिलशाद के इनकाउंटर के बाद शुरू हुआ. ऐसा माना जा रहा है कि नेपाल के इतिहास में पहली बार पर्सा जिला के एसपी गोविंद साह कोई पहले मधेसी है और वे अपने कार्यकाल में सफल नहीं हो इसलिए भारत और नेपाल के पुलिस के बीच संबंध खराब करने के लिए नेपाल के ही कुछ अधिकारी काम कर रहे हैं. हालांकि अब भी दोनों तरफ से कई अधिकारी इस प्रयास में लगे हैं कि शमीम को भारत लाया जा सके. बहरहाल कहना मुश्किल है कि शमीम कब भारतीय एंजेंसी के हाथ आयेगा.
सिमरन कांड
बिगड़ने लगे हैं मोतिहारी व पर्सा पुलिस के बीच संबंध
चर्चा है कि शमीम के साथ नहीं बरामद हुआ था ब्राउन सुगर
भारतीय पुलिस ने कई कांडों में नेपाली पुलिस का दिया था साथ
नेपाली पुलिस ने भी किया था सहयोग, शमीम कांड से आया है नया मोड़
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