अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा पूर्वी चंपारण जिला

Updated at : 02 Dec 2016 5:16 AM (IST)
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अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा पूर्वी चंपारण जिला

खुशखबरी. आंध्रा व अन्य प्रदेश पर नहीं रहेगी निर्भरता जिले में बड़े पैमाने पर हो रहा अंडा उत्पादन आधा दर्जन प्रखंडों में चल रही है यूनिट आसपास के जिलाें में भी हो रही सप्लाइ मोतिहारी : लेयर फार्मिंग(अंडा उत्पादन) में पूर्वी चंपारण आत्मनिर्भर बनेगा. यहां भी बड़े पैमाने पर अंडा उत्पादन होगा. इसका लाभ पड़ोसी […]

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खुशखबरी. आंध्रा व अन्य प्रदेश पर नहीं रहेगी निर्भरता

जिले में बड़े पैमाने पर हो रहा अंडा उत्पादन
आधा दर्जन प्रखंडों में चल रही है यूनिट
आसपास के जिलाें में भी हो रही सप्लाइ
मोतिहारी : लेयर फार्मिंग(अंडा उत्पादन) में पूर्वी चंपारण आत्मनिर्भर बनेगा. यहां भी बड़े पैमाने पर अंडा उत्पादन होगा. इसका लाभ पड़ोसी जिला मुजफ्फरपुर, बेतिया, शिवहर व सीतामढ़ी को भी मिलेगा. इसके साथ ही आंध्रा व अन्य राज्यों पर अंडा की निर्भरता समाप्त होगी. हरित, श्वेत व नीली क्रांति की तर्ज पर लेयर फार्मिग की यहां शुरुआत हो चुकी है. फिलहाल जिला के तकरीबन आधा दर्जन प्रखंडों में अंडा का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है.
नक्सल प्रभावित तेतरिया के अलावा सदर प्रखंड मोतिहारी, चकिया व तुरकौलिया में अंडा उत्पादन की कई यूनिट सुचारू तौर पर संचालित है. जबकि मधुबन में एक बड़ी यूनिट लगायी गयी है. इसमें उत्पादन अलगे माह से शुरू हो जायेगा. इसके साथ ही कई अन्य प्रखंडों में लेयर फार्मिंग की तैयारी चल रही है. उत्पादन का लोकल बाजार उपलब्ध होने एवं व्यवसाय में मुनाफा देख लोगों का व्यवसाय के प्रति रुझान बढ़ा है. जबकि इस व्यवसाय से जुड़े किसान व व्यवसायी अंडा उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं.
50 हजार अंडे का हो रहा उत्पादन: जिला में संचालित लेयर फार्मिंग यूनिट से प्रतिदिन करीब 50 हजार अंडा का उत्पादन हो रहा है. इनमें सबसे अधिक उत्पादन तेतरिया में लगायी गयी यूनिट से हो रहा है. यह यूनिट प्रतिदिन 30 हजार अंडा का उत्पादन कर रही है. वही तुरकौलिया यूनिट से पांच हजार, चकिया से दो हजार, रुलही मस्तान यूनिट से दो हजार अंडा का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है.
विभाग कर रहा प्रोत्साहित : ब्रॉलर के साथ लेयर फॉर्मिग के लिए कुकुट पालन विभाग ने योजना बनायी है. इसका उद्देश्य लेयर फार्मिंग के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना है. ताकि इस व्यवसाय से जुड़ किसान अपनी आय बढ़ा सके. इसको लेकर पशु एवं मत्स्य विभाग ने लेयर फार्मिंग के लिए ऋण का प्रावधान है. जो बैकों से मिलेगा.
84 लाख की है एक यूनिट : कुकुट पालन विभाग के तैयार खाका के मुताबिक प्रति ईकाई 84 लाख की लागत आयेगी. इस यूनिट का एरिया करीब एक एकड़ भूमि होगी. इसमें करीब 10 हजार अंडा देने वाले मुर्गी पालन होगा. प्रतिदिन तकरीबन 30 तक अंडा उत्पादन होगा.
30 प्रतिशत मिलेगा अनुदान : लेयर फार्मिग पर यूनिट की लागत राशि 84 लाख में 20 लाख रुपया मार्जिग मनी लगेगा. शेष लागत खर्च 64 लाख का 30 प्रतिशत अनुदान मिलेगा. बाकी राशि बैक ऋण तौर पर मुहैया होगी. ऋण पर लगने वाले ब्याज पर भी 50 प्रतिशत का सब्सीडी मिलेगा.
ऑनलाइन होगा आवेदन : जिला पोल्ट्री पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार बताते है कि लेयर फार्मिग के लिए इच्छुक आवेदक विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. निदेशालय स्तर से चयन के बाद कागजी प्रक्रिया पूरी करने वाले को यूनिट लगाने का कार्यादेश जारी किया जायेगा. आवेदन में जमीन एवं मार्जिंग मनी से संबंधित बैक स्टेटमेंट संलग्न करना है.
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