मैच की हर गेंद पर चेंज होता है सट्टेबाजों का रेट
Updated at : 12 May 2016 5:30 AM (IST)
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दस व बीस ओवर के सेशन पर लगता है लाखों का दावं शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर सट्टेबाजों के खेल में कई लोग बरबाद हो चुके हैं तो ज्ञान बाबू चौक के सोहन ने 50 लाख हारने के बाद सटा न खेलने की कसम खायी है. इधर, बरियारपर के छात्र के खुलासे के बाद सट्टेेबाज […]
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दस व बीस ओवर के सेशन पर लगता है लाखों का दावं
शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर सट्टेबाजों के खेल में कई लोग बरबाद हो चुके हैं तो ज्ञान बाबू चौक के सोहन ने 50 लाख हारने के बाद सटा न खेलने की कसम खायी है. इधर, बरियारपर के छात्र के खुलासे के बाद सट्टेेबाज दिन रात अपना स्थान बदल रहे हैं .
मोतिहारी : अंगरेजी में जेएसकेटिप्स लिखते ही सट्टेबाजी में क्रिकेट खेल का रेट दिखने लगता है. उसी आधार पर धंधेबाज मोतिहारी शहर में दांव लगाते हैं. यह दांव क्रिकेट के आइपीएल के अलावे राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय क्रिकेट खेलों पर लगाये जाते हैं. जानकार बताते हैं कि कुछ धंधेबाज मुंबई से तो अधिकांश धंधेबाज दिल्ली से सीधे तौर पर जुड़े हैं और वहीं से रेट तय कर शहर में बताते हैं.
हर गेंद पर रेट बदलता रहता है. इसकी जानकारी धंधेबाज मोबाइल से लेते रहते हैं. इस धंधे में मुख्य रूप से तीन लोग हैं जो सेट अप बॉक्स तक लगाये हैं. इसके अलावे दिल्ली से खेलने वाले शहर के मेनरोड, हेनरी बाजार, ज्ञानबाबू चौक, जानपुल, बलुआ छतौनी के कुछ होटल व्यवसायी सहित करीब 600 लोग हैं जो इस खेल से जुड़े हैं. जानकार बताते हैं कि इन धंधेबाजों के खाते से प्रति दिन का लेन देन करीब 15 से 20 लाख है.
क्या है 10 व 20 ओवर का सेशन:
सट्टेबाजी के खेल में प्रत्येक गेंद के अलावे 10 व 20 ओवर में कितने रन बनेंगे. कितने खिलाड़ी आउट होंगे आदि पर भी सटा लगाया जाता है . इसमें एक लाख से दो लाख तक एक व्यक्ति दांव पर लगाता है. हारने वालों के लिए सूद पर पैसा देने वाले को भी धंधेबाज उपलब्ध करा देते हैं. इसका सूद एक हजार का एक दिन में 200 अतिरिक्त होता है .
सट्टेबाजी में क्या है सेटअप बॉक्स: मुंबई व दिल्ली से नेटवर्क परेशानी के कारण बाधा नहीं हो इसके लिए धंधेबाजों ने सेट अप बॉक्स लगवाया है. इसका कॉल रेट प्रति मिनट डेढ़ रुपये होता है .
कई लोगों ने लिया इस खेल से सन्यास : शहर के ज्ञानबाबू चौक निवासी गैस विक्रेता सोहन ने बताया कि हम 50 लाख रुपये कर्ज लेकर बरबाद हो चुके हैं अब खेलना छोड़ दिया है. कर्ज चुकाने में लगे हैं. इसी तरह जानपुल के बिजली सामान के विक्रेता ने बताया पूर्व में काउंटर से 10 हजार रुपये हार चुका है. इससे अब खेलने से कसमें खा ली है.
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