श्रम दिवस सृजन को ले पूर्वी चंपारण राज्य में अव्वल
Updated at : 12 May 2016 5:29 AM (IST)
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पीएचइडी के बाद अब मनरेगा से होगा निजी शौचालय का निर्माण आंगनबाड़ी भवन निर्माण में भी मनरेगा से खर्च होगी राशि मोतिहारी : मनरेगा योजना के तहत श्रम दिवस सृजन मामले में बेहतर प्रदर्शन के लिए पूर्वी चंपारण को अव्वल स्थान मिला है. पूर्वी चंपारण द्वारा मनरेगा योजना में निर्धारित लक्ष्य का 75.6 प्रतिशत कार्य […]
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पीएचइडी के बाद अब मनरेगा से होगा निजी शौचालय का निर्माण
आंगनबाड़ी भवन निर्माण में भी मनरेगा से खर्च होगी राशि
मोतिहारी : मनरेगा योजना के तहत श्रम दिवस सृजन मामले में बेहतर प्रदर्शन के लिए पूर्वी चंपारण को अव्वल स्थान मिला है. पूर्वी चंपारण द्वारा मनरेगा योजना में निर्धारित लक्ष्य का 75.6 प्रतिशत कार्य दिवस सृजित किया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार श्रम दिवस सृजन के लिए पूर्वी चंपारण को 49 लाख श्रम दिवस सृजन का लक्ष्य दिया गया था जो 15-16 के वित्तीय वर्ष में 38 लाख श्रम दिवस का सृजन कर बिहार में अव्वल स्थान पाया है. पहले प्रखंडवार कार्य योजना व संपादित कार्यों का लक्ष्य निर्धारित होता था,
लेकिन नये नियम के तहत पंचायत वार लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि समीक्षा में कोई कठिनाई नहीं हो. डीआरडीए निदेशक दुर्गेश कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव के कारण भी मनरेगा कार्य प्रभावित हुए हैं. चुनाव समाप्त होते ही कार्य में तेजी ला लंबित कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जिन जगहों पर चुनाव कार्य संपन्न हो गये हैं. वहां के पीआरएस व पीओ को कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है.
मनरेगा योजना से जल संरक्षण कार्य को बढ़ावा देने के लिए प्रति पंचायत एक-एक तालाबों का चयन कर विकसित किया जायेगा ताकि गरमी के मौसम में भी तालाब से पानी नहीं सूख सके.
मोतिहारी :जिले की सभी 405 पंचायतों से एक-एक तालाबों का चयन कर जल संचय की दिशा में सकारात्मक कार्य किये जायेंगे, ताकि संरक्षित जल से भीषण गरमी के दिनों में आवश्यक कार्य किये जा सके.
इसे विकसित करने की योजना मनरेगा के तहत बनायी गयी है. विभाग का मानना है कि गरमी के दिनों में अधिकांश तालाब सूख जाते हैं, जिसके कारण आग लगने की स्थिति में पानी की समस्या के अलावे गांव के पशुओं के लिए पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
ऐसे में प्रति पंचायत अगर एक-एक तालाब विकसित कर दिये जायेंगे तो समस्या पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है विशेषकर पशुओं के लिए. इन तालाबों को मनरेगा योजना से विकसित किया जायेगा. चाहे तालाब निजी हो या सरकारी. इसके अलावे आंध्र प्रदेश की तर्ज पर इन तालाबों में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जायेगा. खर्च के बाबत विभाग का कहना है कि तालाब के लिए जमीन की उपलब्धता, गहराई व चौड़ाई के आधार पर खर्च का निर्धारण किया जायेगा.
मॉडल तालाब से होंगे फायदे
प्रति पंचायत कम स कम एक-एक मॉडल तालाब बनाने से गरमी के समय आग लगने की स्थित में इसका फायदा मिलेगा. इसके अलावे पशुओं को गरमी में पानी की आवश्यकता होती है. जाे इधर उधर नहीं भटक कर संबंधित तालाब में जल संचय का लाभ उठा पायेंगे.
नहीं सूखेगा मॉडल तालाब का पानी
मॉडल तालाब का पानी नहीं सूखे इसके लिए बरसात के समय किसी अहर व पइन से जोड़ा जायेगा. इसके अलावे तालाब किनारे पंप सेट या सोलर पंप लगा पानी की कर्मी को पूरा
किया जायेगा .
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