निजी व सरकारी जांच में इतना अंतर !

Updated at : 10 May 2016 2:45 AM (IST)
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निजी व सरकारी जांच में इतना अंतर !

लापरवाही. सदर अस्पताल की जांच रिपोर्ट ने महिला को बताया गंभीर रूप से बीमार जिला : अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय सरकारी जांच घरों में मरीजों के सुविधा व सही जांच के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीन लगा रही है, लेकिन कर्मियों की लापरवाही से रिपोर्ट ऐसी आ रही है कि कमजोर दिल […]

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लापरवाही. सदर अस्पताल की जांच रिपोर्ट ने महिला को बताया गंभीर रूप से बीमार

जिला : अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय सरकारी जांच घरों में मरीजों के सुविधा व सही जांच के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीन लगा रही है, लेकिन कर्मियों की लापरवाही से रिपोर्ट ऐसी आ रही है कि कमजोर दिल वाले का हार्ट फेल हो जाये.
मोतिहारी :सरकारी अस्पताल में स्वस्थ्य व्यक्ति को गंभीर बीमारी से पीड़ित साबित करने वाली रिपोर्ट मिलने से मरीज परेशानी हैं. मोतिहारी के जांच रिपोर्ट से सरकारी जांच घर एक बार फिर कठघेरे में है. आलम यह है कि इसकी रिपोर्ट देखकर चिकित्सक तक चकरा रहे हैं. कमजोर दिल वाले मरीज का हार्टफेल हो जाये तो आश्चर्य नहीं. गड़बड़ी मशीन से हो रही है या नियुक्त कर्मी व तकनीशियन से यह जांच का विषय है. ताजा मामला सदर अस्पताल जांच घर का है. जहां साधारण बीमार व्यक्ति को गंभीर बताया गया है.
अगरवा की पीड़ित महिला अनीता देवी पीठ दर्द व बुखार को ले चिकित्सक के परामर्श के अनुसार छह मई को अस्पताल में ही खून की जांच करायी. रिपोर्ट में पुरजा पर क्रम संख्या 8273 में प्लेट्लेट्स 51 हजार दर्शाया गया था. रिपोर्ट देखी तो पति व बच्चे के साथ घबराकर पुन: चिकित्सक के पास गयी जहां से उन्हें निजी जांच कर में जांच कराने की सलाह दी गयी. निजी जांच घर की रिपोर्ट देख परिजनों की परेशानी शांत हुई.
निजी जांच घर के रिपोर्ट में प्लेटलेट्स एक लाख 20 हजार बताया गया है. यही नहीं निबंधन काउंटर से परची दी गयी है उसपर भी दूसरे का मोबाइल नंबर दिया गया है. पीड़िता के पति रत्नेश ठाकुर ने बताया कि सिर्फ नाम चढ़ा कर पुरजा दे दिया गया है. पूछने पर कर्मी ने तुरंत उक्त क्रम संख्या से दूसरा पुरजा बना दिया जब मिलान कराया गया तो नाम सही और रिपोर्ट में अलग प्लेटलेट्स संख्या था. विभागीय तकनीशियन मदन मोहन झा ने बताया कि आकलन में भूल हो सकती है
मरीज को दोबारा बुलाया गया है, लेकिन मरीज नहीं आये. इधर एक अन्य केस में चिरैया के बीडीओ सुनीता कुमारी ने बताया कि बुखार से पीड़ित मेेरे पुत्र की जांच रिपोर्ट में भी प्लेटलेट्स में गड़बड़ी बतायी गयी थी जो कर्मी की भूल पकड़ी गयी दोबारा जांच में. यह मामला शहर के एक जांच घर का था.
यह हो सकता है मामला : पहले माइक्रोस्कोप से जांच होता था. सरकारी जांच घरों में भी अत्याधुनिक मशीन लगाया गया, लेकिन कर्मियाें को प्रशिक्षित नहीं किया गया. इसके कारण इस तरह की गलतियां हो रही हैं. प्रखंड स्तर प अट्रासाउंड के संचालन में भी अप्रशिक्षित कर्मी द्वारा किया जा रहा है जो जांच का विषय है .
क्या कहते हैं वरीय चिकित्सक: वरीय चिकित्सक डाॅ आशुतोष शरण ने बताया कि स्वस्थ्य आदमी में डेढ़ लाख प्लेटलेट्स होना चाहिए. कम से कम एक लाख भी. 80 हजार से कम होना खतरनाक माना जाता है. इसमें शरीर से रक्त श्राव का खतरा होता है. प्लेटलेट्स डेंंगू बुखार, लीवर की बीमारी, कैंसर आदि में कम होता है. उन्होंने कहा कि अगर कहीं जांच में प्लेटलेट्स कम हो तो दूसरे जगह भी जांच कराकर मरीज के परिजनों को संतुष्ट होना चाहिए. दो जांच में 10 ये 15 हजार का अंतर हो सकता है, लेकिन इतने का अंतर होना गंभीर मामला है.
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