कैसे दूर होगी परेशानी. जिले में दमकल की संख्या है िसर्फ 19, संसाधनों के अभाव से जूझ रहे कर्मचारी
Updated at : 04 Apr 2016 4:59 AM (IST)
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अग्निशमन वाहनों में पानी भरने का नहीं है साधन 13 बड़ी व छह छोटी गाड़ियों के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश सदर अनुमंडल-बड़ी-2, छोटी-1 अरेराज -बड़ी-2, छोटी-1 रक्सौल-बड़ी-3, छोटी-1 चकिया-बड़ी-2, छोटी-2 सिकराहना-बड़ी-2,छोटी-1 पकडीदयाल-बड़ी-2 अनुमंडल स्तर पर आवंटित की गयी हैं अग्निशमन वाहनें लगातार हो रही अगलगी की घटनाओं ने विभागीय अधिकारी सकते में […]
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अग्निशमन वाहनों में पानी भरने का नहीं है साधन
13 बड़ी व छह छोटी गाड़ियों के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश
सदर अनुमंडल-बड़ी-2, छोटी-1
अरेराज -बड़ी-2, छोटी-1
रक्सौल-बड़ी-3, छोटी-1
चकिया-बड़ी-2, छोटी-2
सिकराहना-बड़ी-2,छोटी-1
पकडीदयाल-बड़ी-2
अनुमंडल स्तर पर आवंटित की गयी हैं अग्निशमन वाहनें
लगातार हो रही अगलगी की घटनाओं ने विभागीय अधिकारी सकते में
क्या कहते हैं अधिकारी
सूचना मिलने के साथ ही अग्निशामन वाहन भेज दिये जाते हैं. प्रत्येक दो किलोमीटर की दूरी पर हाड्रेंट निमार्ण की योजना है. पाइप जलापूर्ति योजना के तहत अग्निशमन सेवा के लिए पीएचइडी को लिखा जा चुका है.
विनोद कुमार, जिला अग्निशमालय
मोतिहारी :जिले में लगातार हो रही अगलगी की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष एक तरफ जहां
अगलगी घटनाओं में काफी वृद्धि हुई, वहीं, दूसरी तरफ अग्निशमन विभाग के पास संसाधनों का घोर अभाव है. विभाग के पास जिले में वाहनों की संख्या काफी कम है. ऐसे में आग पर काबू पाने के लिए जनता को खुद जागरूक
होना पड़ेगा.
मोतिहारी :अगलगी की घटनाओं पर शिकंजा कसने का दावा करने वाला जिले का अग्निशमन विभाग इन दिनों खुद समस्याओं के मकड़ जाल में फंसा हुआ है. विभाग के पास न तो प्रचुर मात्र में अग्निशमन वाहन हैं और न ही पानी भरने का संसाधन. मात्र मोतिहारी व रक्सौल में ही उसकी गाड़ियों में पानी डालने का साधन है.
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग के पास 19 दमकल वाहन हैं. इनमें 13 बड़ी व
छह छोटी गाड़ी है. इन्हें
अनुमंडल स्तर पर आवंटित किया गया है. किसी अनुमंडल को दो व किसी को तीन अग्निशमन गाड़ियां दी गयी हैं.
तालाब से भरा जाता है पानी
पानी टंकी की कमी के कारण गाड़ियों में तालाब से पानी भरा जाता है. एक वाहन में साढ़े चार हजार गैलन पानी भरा जाता है. जिस क्षेत्र में आग लगती है उस क्षेत्र में पहुंचने पर अगर पानी नहीं है तो ऐसी स्थित में तालाब का सहारा लिया जाता है. तालाब में पाइप बिछाया जाता है और पानी भरा जाता है.
पिछले वर्ष 105 हुई थीं अगलगी की घटनाएं
वर्ष 2015 में अगलगी की
घटनाएं 105 हुई थी. जिले के बंजरिया, मोतिहारी, सुगौली, ढाका,
छौड़ादानो आदि प्रखंडों के गांवों में अगलगी घटनाएं घटी थी. इस बार संख्या अधिक होगी. वर्ष 2016 में मार्च तक 35 घटनाएं घट चुकी हैं. इसमें जहां सैकड़ों घर जलकर
राख हुए हैं, वहीं, लाखों की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है.
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