मुसलमानों के लिए विशेष इनाम है रमजान
Updated at : 07 May 2019 2:54 AM (IST)
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मोतिहारी : रमजान का महिना मुसलमानों के लिए विशेष इनाम का है. यह महिना गमख्वारी का भी महिना है जहां एक दूसरे का गम बांटा जाता है और पूरी दुनिया को इनसानियत की रस्सी में बांधा जाता है. उक्त बातें जामा मस्जिद के इमाम व प्रसिद्ध उलेमा कारी जलालुद्दीन काशमी ने रविवार को प्रभात खबर […]
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मोतिहारी : रमजान का महिना मुसलमानों के लिए विशेष इनाम का है. यह महिना गमख्वारी का भी महिना है जहां एक दूसरे का गम बांटा जाता है और पूरी दुनिया को इनसानियत की रस्सी में बांधा जाता है. उक्त बातें जामा मस्जिद के इमाम व प्रसिद्ध उलेमा कारी जलालुद्दीन काशमी ने रविवार को प्रभात खबर को दिये एक बयान में कही.
उन्होनें कहा कि अल्लाह रहमतों की बारिश करता है और अपने बंदों पर खास मेहरबान होता है. इस महिने में एक ऐसी रात भी होती है जो खास मोकद्दस होती है और हजारों महिनों के इबादत से बेहतर होती है. पूरे उम्मत के लिए यह महिना नेहायत बा बरकत का महिना है और जो इस महिने में नफीली अमल अदा करेगा उसे फर्ज के बराबर श्वाब मिलेगा. रात के तरावीह की भी अपनी एक अलग अहमियत है.
तरावीह सुन्नत है और हर किसी को तरावीह की नमाज अदा करनी चाहिए. बताया कि वे सबसे अधिक खुशनीब हैं जो इस महिने का एहतराम करते हैं और रोजा रखने के साथ इबादत करते हैं. शाम में रोजेदारों का इफ्तार कराना भी काफी मायने रखता है. इफ्तार कराने वाले व करने वाले दोनों को अल्लाह बराबर श्वाब देता है और उनके उपर रहमतों की बारिश करता है. तमाम दुआएं इस महिनें में कबूल होती हैं और जन्नत का दरवाजा खुल जाता है. कारी कासमी ने आगे कहा कि यह महिना सब्र का भी पैगाम देता है. सब्र का बदला जन्नत होता है.
तीन असरे में बांटा गया है रमजान : रमजान को तीन असरे में बांटा गया है.पहला असरा रहमत का होता है जो पहली रमजान से 10 रमजान तक है.इसमे अल्लाह अपने नेक बंदो पर रहमत नाजिल फरमाता है.दूसरा असरा मगफिरत का होता है यह 11 रमजान से 20 रमजान का होता है.इसमे अल्लाह अपने परहेजगार बंदो की मगफिरत करता है. और तीसरा और आखिरी असरा 21 रमजान से आखिरी तक होता है इसमें मोमिन बंदे को जहन्नुम से आजादी का परवाना अता कर दिया जाता है.
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