गणेश फर्नीचर सेंटर को पांच हजार रुपये का जुर्माना
Updated at : 17 Apr 2018 8:36 AM (IST)
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मोतिहारी : जिला उपभोक्ता फोरम ने वाद संख्या-133/2014 की सुनवाई करते हुए शहर के मिशन चौक पर स्थित गणेश फर्नीचर सेंटर की सेवा में भारी कमी पाया है और पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड दिया है. बेटी की शादी में उपहार के रूप में दी जाने वाली दीवान पलंग व ड्रेसिंग टेबल में सागवान […]
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मोतिहारी : जिला उपभोक्ता फोरम ने वाद संख्या-133/2014 की सुनवाई करते हुए शहर के मिशन चौक पर स्थित गणेश फर्नीचर सेंटर की सेवा में भारी कमी पाया है और पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड दिया है. बेटी की शादी में उपहार के रूप में दी जाने वाली दीवान पलंग व ड्रेसिंग टेबल में सागवान की जगह कमजोर लकड़ी जगह-जगह पर लगाया था और उसे रंग-पेंट से छुपा दिया था.
कच्ची लकड़ी होने के कारण पलंग में घून पकड़ लिया. जब खराबी की शिकायत फर्नीचर सेंटर के संचालक से की और ठीक करने का अनुरोध किया तो इंकार कर दिया. सेंटर संचालक के इंकार करने पर परिवादी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया. जानकारी के अनुसार शहर के नकछेद टोला निवासी नागेंद्र आर्य ने अपनी बेटी के लिए फर्नीचर बनवाया था. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व आवश्यक कागजात की समीक्षा के उपरांत फोरम के अध्यक्ष रामचंद्र सहनी व सदस्य अजहर हुसैन अंसारी की संयुक्त बैंच ने गणेश फर्नीचर की सेवा में भारी कमी पाते हुए आठ सप्ताह के अंदर फर्नीचर की खराबी ठीक करने का आदेश दिया और किसी भी तरह की देरी नहीं करने की नसीहत दी है. फोरम ने यह भी कहा है कि निर्धारित समय सीमा पर अगर अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं हुआ तो नौ प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देना होगा.
सखुआ के नाम पर कच्ची लकड़ी का इस्तेमाल!
मोतिहारी. सावधान, सखुआ के नाम पर फर्नीचर में दी जाने वाली लकड़ी कच्ची तो नही है! जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा शहर के गणेश फर्नीचर सेंटर की सेवा में कमी पाये जाने व कमजोर लकड़ी लगाने को लेकर दिये गये फैसले ने जिले में एक लंबी बहस छेड़ दी है. ऐसा तो नही की अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कारोबारी रंग-रोगन कर उपभोक्ताओं का दोहन कर रहे हैं. शादी-विवाह का मौसम है और हर कोई अपनी बेटी को उपहार के रूप में मजबूत पलंग व अन्य फर्नीचर देना चाहते हैं. 40 हजार रुपये में दीवान पलंग बेचे जा रहे हैं, जबकि 15 हजार रुपये में ड्रेसिंग टेबुल. इधर जानकार बताते हैं कि सखुआ के नाम पर पहले से ही ठगने का काम कई इलाकों में हो रहा है.
फर्नीचर सेंटरों व दुकानों की होनी चाहिए जांच : जिले में संचालित फर्नीचर दुकानों व सेंटरों की जांच होनी चाहिए. ताकि गुणवत्ता का पता चल सके और सही लकड़ी का फर्नीचर मिल सके. सामाजिक कार्यकर्ता साजिद रजा ने बताया कि फर्नीचर दुकानों का भी मापदंड निर्धारित होनी चाहिए. कहां से वे लकड़ी ला रहे हैं इसका भी पुख्ता प्रमाण हो.
बिना रजिस्ट्रेशन के शहर में चल रहे दर्जनों फर्नीचर की दुकानें : शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिना रजिस्ट्रेशन के दर्जनों फर्नीचर की दुकानें चल रही हैं. निबंधन नही होने के कारण खुलेआम प्रतिष्ठान अधिनियमों की धज्जियां उड़ायी जाती है और सरकार के राजस्व को चूना लगाया जाता है. हालांकि इसकी शिकायतें समय-समय पर प्रशासन को मिलती है लेकिन कोई कार्रवाई नही होने से उनपर कोई असर नही पड़ता है.
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