पुलिस के पास नहीं है निजी स्कूलों का डाटाबेस

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Dec 2017 6:35 AM

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मोतिहारी : पूर्वी चंपारण में निजी स्कूलों का डाटाबेस पुलिस के पास नहीं है. इस कारण सुरक्षा प्रबंध की जांच-पड़ताल नहीं हो पाती है. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युमन हत्याकांड के बाद सरकार का इस तरफ विशेष ध्यान है. सरकार ने निजी स्कूलों की सुरक्षा प्रबंध का जिम्मा पुलिस को दी है, […]

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मोतिहारी : पूर्वी चंपारण में निजी स्कूलों का डाटाबेस पुलिस के पास नहीं है. इस कारण सुरक्षा प्रबंध की जांच-पड़ताल नहीं हो पाती है. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युमन हत्याकांड के बाद सरकार का इस तरफ विशेष ध्यान है.

सरकार ने निजी स्कूलों की सुरक्षा प्रबंध का जिम्मा पुलिस को दी है, जिसके बाद पुलिस गंभीरता पूर्वक डाटाबेस तैयार करने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी से पुलिस ने सूची मांगी है. बावजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सूची नहीं उपलब्ध करायी है.
जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युमन हत्याकांड के बाद गृह विभाग (विशेष शाखा) ने बिहार के तमाम जिलों के प्राइवेट स्कूल की सुरक्षा प्रबंध की समीक्षा करने का निर्देश पुलिस को दिया था. उसमें कहा गया था कि प्राइवेट स्कूल के शिक्षक से लेकर चपरासी व वाहन चालकों के नाम व पते के साथ उनका आधार व मोबाइल नंबर लेना है.
बसों के लिए क्या है नियम
बस का रंग पीला, उसके दोनों तरफ स्कूल का नाम काले अक्षरों में लिखा होना चाहिए, बस स्कूली है या किराये की, यह भी लिखा होना चाहिए. चालक का नाम, पता व फोन नंबर के अलावा लाइसेंस नंबर या बस मालिक का नाम, फोन नंबर, हेल्प लाइन नंबर भी लिखना अनिवार्य है. बस के अंदर खिड़की पर क्षतिज ग्रिल या जाली, दरवाजे पर लॉक, आपातकालीन दरवाजा, गति सीमा, चालक की केबिन व आपातकालीन दरवाजे के पास अग्निशामक यंत्र, सभी स्कूली बसों में जीपीएस व सीसीटीवी कैमरा, फर्स्ट एड बॉक्स, चालक का कम से कम पांच वर्षों का अनुभव व बैच लाइसेंस व प्रशिक्षित महिला गार्ड की तैनाती अनिवार्य है.
बसों में नहीं है सुरक्षा व्यवस्था
स्कूली बसों की खिड़की में तार व ग्रिल की जाली लगानी है, ताकि बच्चे हाथ या सिर खिड़की से बाहर नहीं निकाल सके. यहां स्कूली बसों की खिड़की में ऐसा कुछ नहीं है. सीबीएसइ से संबद्धता प्राप्त स्कूलों की ओर से संचालित बसों का यही हाल है. स्कूल में चलनेवाले ऑटो व वैन की स्थिति और चिंताजनक है. परिणाम सड़कों पर देखा जा सकता है.
थानाध्यक्षों को निजी स्कूलों की सुरक्षा प्रबंध की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है. उनसे समीक्षा रिपोर्ट भी मांगी गयी है. जल्द निजी स्कूलों की सुरक्षा चुस्त-दुरुस्त कर लिया जायेगा.
पंकज कुमार रावत, डीएसपी सदर
सभी डीपीओ की बैठक कर जिले में संचालित निजी स्कूलों की सूची बना कर पुलिस को सौंपने का निर्देश दिया गया है. पुलिस द्वारा मांगी गयी रिपोर्ट के आलोक में अन्य बिंदुओं पर जांच की जा रही है. जिले में छोटे-बड़े करीब डेढ़ सौ मान्यता प्राप्त स्कूल है.
इफ्तेखार अहमद, जिला शिक्षा पदाधिकारी, मोतिहारी
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