भाइयों के लिए लंबी उम्र की कामना की
Updated at : 22 Oct 2017 6:23 AM (IST)
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भैयादूज. अहले सुबह पारंपरिक गीतों के बीच बहनों ने गोधन कूटा रक्सौल : राम भइया चलले अहेरिया कि बेला बहनी देहली आशिष आदि गीत के साथ प्रखंड क्षेत्र के सभी चौक-चौराहों पर शनिवार की अहले सुबह सुनायी देने लगा. मौका था गोवर्धन पूजा यानी भैयादूज के त्योहार का. भैयादूज के अवसर पर महिलाएं एकत्रित होकर […]
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भैयादूज. अहले सुबह पारंपरिक गीतों के बीच बहनों ने गोधन कूटा
रक्सौल : राम भइया चलले अहेरिया कि बेला बहनी देहली आशिष आदि गीत के साथ प्रखंड क्षेत्र के सभी चौक-चौराहों पर शनिवार की अहले सुबह सुनायी देने लगा. मौका था गोवर्धन पूजा यानी भैयादूज के त्योहार का. भैयादूज के अवसर पर महिलाएं एकत्रित होकर पूजा अर्चना शुरू कर दी और पारंपरिक गीतों के बीच भक्ति भाव के साथ गोधन भगवान की पूजा की. इस दौरान सबसे पहले बहनो के द्वारा अपने भाई को मरने का श्राप दिया गया. इसके बाद अपने भी जिह्वा में रेग्नी का काट चुभोकर श्राप के लिए माफी मांगी गयी
और गोवर्धन भगवान से अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की गयी. आचार्य मंजय कुमार मिश्र ने बताया कि गोवर्धन पूजा करने के बाद बहने जो बजरी का प्रसाद अपने भाइयो को खिलाती है उससे भाई को बल मिलता है तथा उसके अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है. उन्होने बताया कि गोवर्धन पूजा के साथ ही सभी प्रकार के शुभ कार्य की शुरुआत हो जाती है. शादी विवाह, गृह-प्रवेश, पाणिगृह संस्कार सहित अन्य कार्य की शुरूआत होती है.
उन्होंने बताया कि कार्तिक मास की पूर्णिमा तक बहन अपने भाइयो को बजरी का प्रसाद खिला सकती है. शहर के साथ-साथ गांव में गोवर्धन पूजा की धूम रही. गांव-गांव में भी महिलाओं ने गोधन भगवान की पूजा की और भाइयों के लंबी उम्र की कामना की. इधर, गोधन पूजा के बाद महिलाएं छठ पूजा की तैयारी में जूट गयी है. गोधन कूटने के बाद महिलाएं नदी तट पर पारंपरिक छठी मइया के गीत को गाते हुये गयी और छठ पूजा में प्रयोग होने वाले चुल्हे के लिए मिट्टी लाने का क्रम शुरू हो गया.
पूजन सामग्री से सजने लगा बाजार : गोवर्धन पूजा के साथ ही छठ पूजा को लेकर बाजार सज चुका है. अभी थोक कारोबारी मेन रोड में आकर जम गये है और उनसे छोटे दूकानदार छठ पूजा की सामग्री की खरीद कर रहे है. आचार्य श्री मिश्र ने बताया कि इस बार मंगलवार को नहाय-खाय, बुधवार को खरना, गुरुवार को अस्चलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य तथा शुक्रवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व का समापन होगा.
चकिया : शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को भैया दूज धूमधाम से मनाया गया. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यम द्वितीया या भैया दूज का त्यौहार मनाया. आज के दिन बहन को अपने भाइयों को श्रापने की परंपरा है. इस दिन गोधन भी कुटी जाती है. कहा जाता है की बहन का श्राप भाइयों के लिए आशीर्वाद होता है. बहन अपने भाई के दीर्घायु की कामना करती है. भैया दूज पर भाई अपने बहन के घर जाकर उनके हाथों का बना खाना खाते हैं और उन्हें उपहार देते हैं. वही बुजुर्गों का कहना है कि यदि बहन नहीं है तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व का ध्यान कर उसके समीप भोजन करना शुभ माना जाता है.
अरेराज : अनुमंडल क्षेत्र में श्रद्धा के साथ गोवर्द्धन पूजा संपन्न हो गया. मंगल गीत गाकर जियसु हो मोरा भैया जीय भैया लाख बरीस हो… मंगल गीत गाकर भाइयों को आशीष दिया. उन्हें मिठाई व बजडी खिलाकर मुंह मीठा किया. आज के दिन से महिलाओं ने मंगल गीत गाकर शुभ कार्यों को आरंभ करने का संकेत दिया. सदियों से यह परंपरा भारतीय समाज में चला आ रही है. आज के दिन से ही वैवाहिक कार्य शुरू हो जाएंगे. वही भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी अत्यंत आस्था और श्रद्धा के साथ कायस्थ समाज के लोगों ने कलम दवात की पूजा कर किया.
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