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buxar news : कहां गयी दो करोड़ से अधिक जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई

Updated at : 08 Jan 2026 10:27 PM (IST)
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buxar news : कहां गयी दो करोड़ से अधिक जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई

buxar news : नया भोजपुर पैक्स का 2021-22 तक हो चुका था ऑडिट, फिर भी दबी रह गयी गड़बड़ीजमाकर्ताओं के पैसों से पैक्स अध्यक्ष ने खड़ी की संपत्ति, विभागीय कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

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buxar news : डुमरांव. नया भोजपुर पैक्स घोटाले के सामने आने के बाद न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं.

दो करोड़ रुपये से अधिक की जमाराशि के गबन का यह मामला अब महज एक आपराधिक कांड नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और मिलीभगत का प्रतीक बनता जा रहा है. एफआइआर दर्ज होने के बाद जहां पैक्स अध्यक्ष मेराज खां और उनसे जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. वहीं विभागीय चुप्पी और पूर्व की निष्क्रियता भी कटघरे में हैं. जानकारी के अनुसार, नया भोजपुर पैक्स द्वारा जमा वृद्धि योजना के नाम पर बीते डेढ़ दशक से अधिक समय से तथाकथित बैंक संचालन किया जा रहा था. गांव के दर्जनों लोगों ने अपने खून-पसीने की कमाई बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए यहां जमा की. लेकिन जब आरडी-एफडी की अवधि पूरी हुई, तो पैसा लौटाने के बजाय पैक्स कार्यालय पर ताला जड़ दिया गया.

पहले दबाया गया मामला, अब जाकर हुई एफआइआर

घोटाले की आहट पिछले वर्ष ही मिल चुकी थी. तब नया भोजपुर थाना पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने के बजाय थाने में ही समझौता करा दिया. इस समझौते में पैक्स अध्यक्ष मेराज खां ने लिखित रूप से यह स्वीकार किया था कि वे सभी जमाकर्ताओं का पैसा जल्द लौटा देंगे. लेकिन यह आश्वासन महज दिखावा साबित हुआ. समझौते के बाद केवल उन्हीं चुनिंदा जमाकर्ताओं को राशि लौटायी गयी, जिनकी गांव में सामाजिक पकड़ मजबूत थी. कमजोर और गरीब तबके के जमाकर्ताओं को अपमानित कर भगा दिया गया.

एसपी के जनता दरबार में फूटा गुस्सा

मामला तब निर्णायक मोड़ पर पहुंचा जब हाल ही में नया भोजपुर थाने में आयोजित एसपी के जनता दरबार में दर्जनों ग्रामीण सामूहिक रूप से पहुंचे. ग्रामीणों की आपबीती सुनकर स्वयं एसपी भी भौचक रह गये. उन्होंने तत्काल थानाध्यक्ष को सामूहिक आवेदन के आधार पर एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद जाकर नया भोजपुर थाने में इस घोटाले को लेकर एफआइआर दर्ज हुई.

ऑडिट रिपोर्ट में सबकुछ दिखाया गया सामान्य

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पैक्स का वित्तीय वर्ष 2021-22 तक अंकेक्षण (ऑडिट) हो चुका है. सवाल यह उठता है कि जब ऑडिट रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य दिखाया गया, तो दो करोड़ से अधिक की राशि आखिर गयी कहां? क्या यह ऑडिट की गंभीर लापरवाही है या फिर योजनाबद्ध तरीके से गड़बड़ी को नजरअंदाज किया गया? अब ऑडिटर की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गयी है.

जमाकर्ताओं के गंभीर आरोप

अब तक 32 जमाकर्ताओं ने सामूहिक रूप से एफआइआर दर्ज करायी है, जिनका दावा है कि उनकी दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गबन किया गया है. ग्रामीण सूत्र बताते हैं कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है. कई जमाकर्ताओं के पासबुक कथित तौर पर राशि भुगतान के बहाने जब्त कर लिए गए, ताकि वे कानूनी कार्रवाई न कर सकें. कुछ लोग अब भी पैक्स प्रबंधन के झांसे में हैं, जबकि कई पुराने रिश्तों के चलते चुप्पी साधे हुए हैं. जानकारों का मानना है कि यदि निष्पक्ष और गहराई से जांच हुई, तो न सिर्फ पीड़ितों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि गबन की राशि भी दोगुनी हो सकती है.

कई बिंदुओं पर की जा रही जांच : एसडीपीओ

एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने कहा कि एफआइआर के बाद कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है. कितने लोगों से किस मद में राशि ली गयी, पैसा कहां गया और किसकी भूमिका क्या रही. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाये जाने वाले सभी लोगों पर कार्रवाई होगी, चाहे उनका नाम एफआइआर में हो या नहीं.

आप्त सचिव के निर्देश पर शुरू कर दी गयी जांच

जिला सहकारिता पदाधिकारी चंद्रमा राम ने कहा कि सहकारिता विभाग के आप्त सचिव के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गयी है. जांच के बाद ही गबन की वास्तविक राशि स्पष्ट होगी. उन्होंने कहा कि पैक्स अध्यक्ष, बैंक प्रबंधक, एजेंट और पूरी समिति की भूमिका की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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