टीबीमुक्त भारत कार्यक्रम को गति देने के लिए जुटा जिला यक्ष्मा केंद्र

Updated at : 19 Jun 2024 11:33 PM (IST)
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टीबीमुक्त भारत कार्यक्रम को गति देने के लिए जुटा जिला यक्ष्मा केंद्र

बक्सर जिले में प्रधानमंत्री टीबीमुक्त भारत कार्यक्रम को गति देने के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र लगातार प्रयासरत है. इसके तहत जिले की टीबीमुक्त पंचायतों को जल्द ही सम्मानित किया जायेगा. इनमें बक्सर सदर प्रखंड की कमरपुर और जासो के साथ चौसा प्रखंड की सरेंजा पंचायत शामिल हैं.

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बक्सर जिले में प्रधानमंत्री टीबीमुक्त भारत कार्यक्रम को गति देने के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र लगातार प्रयासरत है. इसके तहत जिले की टीबीमुक्त पंचायतों को जल्द ही सम्मानित किया जायेगा. इनमें बक्सर सदर प्रखंड की कमरपुर और जासो के साथ चौसा प्रखंड की सरेंजा पंचायत शामिल हैं. पहले वर्ष के लिए चयनित पंचायतों को कांस्य प्रतिमा दी जा रही है. लगातार दो वर्षों तक यह दर्जा बरकरार रहने पर रजत और तीन वर्षों तक यह दर्जा बने रहने पर पंचायतों को गांधी जी की स्वर्ण प्रतिमा दी जायेगी. हालांकि, इसके लिए जिले के सभी प्रखंडों में दो-दो पंचायतों का चयन किया गया था, जिनको टीबीमुक्त बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं. जल्द ही शेष बची पंचायतों में टीबीमुक्त पंचायत कार्यक्रम के तहत निर्धारित इंडिकेटर्स को पूरा कर उन्हें भी टीबीमुक्त पंचायत घोषित किया जायेगा. जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शालिग्राम पांडेय ने बताया कि निक्षय मित्र टीबी मुक्त पंचायत अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है. इस योजना के माध्यम से टीबी के इलाजरत मरीजों को गोद लेकर इलाज अवधि तक फूड बास्केट उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों की पोषण की कमी को दूर किया जा सके. उन्होंने बताया कि जिले में 2688 मरीज इलाजरत हैं, जिनमें 18944 मरीजों ने निक्षय मित्र योजना के तहत गोद लिये जाने के लिए कंसेंट फॉर्म भर दिये हैं. वहीं, पांच लोगों ने इसके लिए मना कर दिया है, जिनके लिए जिले में 63 निक्षय मित्र बनाये गये हैं, जिनमें से 59 सक्रिय हैं. साथ ही, उनके माध्यम से जिले में अब तक 297 फूड बास्केट का वितरण किया गया है. ज्यादा-से-ज्यादा टीबी मरीजों को गोद लिया जा सके इसके लिए हमें और निक्षय मित्र बनाने हैं. सिविल सर्जन डॉ सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि टीबीमुक्त पंचायत के लिए सरकार ने कुछ इंडिकेटर निर्धारित किये हैं, जिनमें कार्यक्रम के तहत चयनित पंचायतों में एक हजार जनसंख्या पर एक या एक से कम मरीज होने चाहिए. इसी तरह उस इलाके में एक हजार लोगों में कम-से-कम 30 लोगों की बलगम जांच अनिवार्य है. एक वर्ष तक 85 फीसदी ट्रिटमेंट सेक्सस रेट होना चाहिए. साथ ही, डीबीटी के तहत पहला निक्षय पोषण का लाभ लेना जरूरी है. टीबीमुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को पोषण कीट दी गयी हो. यूनिवर्सल ड्रग्स सेंसिटिविटी टेस्ट भी अनिवार्य है. इन इंडिकेटर्स को पूरा करने वाली पंचायतों को 2023 के लिए एक साल की टीबीमुक्त ग्राम पंचायत का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है.

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