सृष्टि का एकमात्र सर्वश्रेष्ठ तत्व है सत्य : आचार्य पौराणिक जी

Updated at : 18 Jun 2025 10:31 PM (IST)
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सृष्टि का एकमात्र सर्वश्रेष्ठ तत्व है सत्य : आचार्य पौराणिक जी

शहर के रामरेखाघाट स्थित श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम के तत्वावधान में चल रहे 17वें धर्मायोजन के छठवें दिन बुधवार को विविध कार्यक्रम संपन्न हुए.

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बक्सर. शहर के रामरेखाघाट स्थित श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम के तत्वावधान में चल रहे 17वें धर्मायोजन के छठवें दिन बुधवार को विविध कार्यक्रम संपन्न हुए. लक्ष्मी नारायण महायज्ञ को लेकर प्रात:काल से दोपहर तक वैदिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन व हवन कुंड में आहूतियां दी गयी. प्रतिदिन की तरह शाम 4 बजे से मार्कंडेय पुराण कथामृत की वर्षा की गयी. कथा में आचार्य श्रीकृष्णानंद, पौराणिक शास्त्री ने कहा कि इस अखिल सृष्टि में सत्य ही एकमात्र सर्वश्रेष्ठ तत्व है. क्योंकि संपूर्ण लोक सत्य पर ही टिका है तथा सत्य के अलावा कोई दूसरा आधार नहीं है. मानव समाज का उद्धार सत्य से ही संभव है. लिहाजा सत्य से बड़ा यज्ञ, तप, दान व धर्मआदि कुछ भी नहीं है. पुराण में वर्णित पक्षियों व महर्षि जैमिनी संवाद का उल्लेख करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि महाराज हरिश्चंद्र अपने सत्य के प्रभाव से ही पत्नी, पुत्र एवं प्रजा जनों के साथ उत्तम लोक को प्राप्त किए. जैमिनी ने पूछा हरिश्चंद्र जी किस सत्य का पालन किए तो चारों पक्षियों ने बताया कि हे तपोनिधि एक दिन स्वर्ग में विश्वामित्र तथा वशिष्ठ जी के बीच मृत्यु लोक में सर्वश्रेष्ठ सत्यवादी को लेकर विवाद हो गया. महर्षि वशिष्ठ का कथन था की सर्वश्रेष्ठ सत्य वक्ता अयोध्या नरेश हरिश्चंद्र जी हैं, लेकिन विश्वामित्र इससे सहमत नहीं थे. ऐसे में एक समय महर्षि वशिष्ठ के 12 वर्षों के लिए जल में तप करने चले जाने पर अनुकूल मौका देख महर्षि विश्वामित्र ने परीक्षा लेने की नियत से वह ब्राह्मण बनकर हरिश्चंद्र से संपूर्ण राज्य दान प्राप्त कर लिया. दान के बाद जब राजा हरिश्चन्द्र को पता चला की छल-कपट से मेरे राज्य का हरण किया गया है, फिर भी अपने वचन की सत्यता की रक्षा के लिए प्रतिकार नहीं किये. सत्य के पालन में राजा ने अपनी पत्नी, पुत्र रोहित तथा स्वयं को एक डोम के हाथों बेच दिया, किंतु अपना वचन असत्य नहीं होने दिया. आज समाज में सत्य की ही शव यात्रा निकाली जा रही है, चाहे वह धर्माचार्य हों, राजनीतिज्ञ नेता हों अथवा अन्य कोई भी व्यक्ति हों, सभी जगह पर सत्य की हत्या तथा असत्य का पोषण हो रहा है. संपूर्ण मानव समाज सत्य तथा मिथ्या तत्वों में जी रहा है. यही कारण है कि सर्वत्र ही सुख, शांति तथा प्रेम का नामो निशान मिट गया है. कथा को विस्तार देते हुए महाराज श्री ने कहा कि असत्य से बढ़कर दूसरा कोई पाप नहीं है. लिहाजा असत्य को पकड़ लेने मात्र से ही संपूर्ण विपत्तियों का आमंत्रण तथा असत्य को छोड़कर सत्य को पकड़ लेने मात्र से ही समस्त सद्गुणों का खजाना मिल जाता है. अतएव श्री मार्कंडेय पुराण का स्पष्ट कथन है कि सत्य का समर्थन, पोषण, पालन व आचरण करने वाला व्यक्ति दुनिया का सर्वश्रेष्ठ महापुरुष तथा सत्य सहित सत्यमय जीवन जीने वाला सर्वश्रेष्ठ महापुरुष संसार को भयमुक्त करने वाला महा मानव है.

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