Buxar News: शासन करने के साथ न्यायपूर्वक प्रजा का पालन करना राजा का धर्म : देवकीनंदन ठाकुर

Updated:
विज्ञापन
Buxar News: शासन करने के साथ न्यायपूर्वक प्रजा का पालन करना राजा का धर्म : देवकीनंदन ठाकुर

आइटीआइ मैदान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि भागवत दिव्य, पावन और कल्याणकारी ग्रंथ है.

विज्ञापन

बक्सर

आइटीआइ मैदान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि भागवत दिव्य, पावन और कल्याणकारी ग्रंथ है. इसकी कथा सुनने मात्र से प्रेत का भी कल्याण हो जाता है. ऐसे में श्रद्धा और निष्काम भाव से सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण करने वाले व्यक्ति का कल्याण और मोक्ष असंभव कैसे हो सकता है.

उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव जीवन की दिशा को मोक्ष की ओर मोड़ देती है. संसार में जितने भी प्रपंच, दुःख और मोह-माया हैं, उनसे ऊपर उठकर केवल ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाना ही भागवत का सच्चा उद्देश्य है. एक राजा के कर्तव्य व दायित्व का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जिस राजा के राज में प्रजा दुखी होती है उस राजा को नर्क में जाना पड़ता है. राजा का धर्म केवल शासन करना नहीं, अपितु न्यायपूर्वक प्रजा का पालन करना भी है. भागवत में प्रजा का दुःख राजा का व्यक्तिगत दुःख माना गया है. कथा को विस्तार देते हुए श्री ठाकुर जी महाराज ने कहा कि जो मनुष्य शुद्ध हृदय, श्रद्धा और समर्पण भाव से भागवत कथा को सुनता है वह दैहिक (शारीरिक), दैविक (दैवी प्रकोप) और भौतिक (सांसारिक कष्ट) इन तीनों प्रकार के पापों एवं कष्टों से मुक्त हो जाता है भागवत कथा केवल एक कथा नहीं, बल्कि आत्मा का शुद्धिकरण है, जो जीव को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परम शांति की ओर ले जाती है. स्वच्छ और सुसंस्कृत कपड़ा ही करें धारण : मौजूदा परिवेश में हो रहे पहनावा-ओढ़ावा पर आइना दिखाते हुए श्री ठाकुर जी ने कहा कि मनुष्य को सदैव स्वच्छ और सुसंस्कृत वस्त्र धारण करना चाहिए. फटे-पुराने कपड़े पहनना न केवल अशोभनीय होता है, बल्कि यह दरिद्रता, नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है. जिस घर में ऐसे वस्त्रों का अपमान होता है या उन्हें संभाल कर नहीं रखा जाता, वहां दरिद्रता और मानसिक अशांति का वास होता है. धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं ईश्वर : महाराज श्री ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म का बोलबाला होता है, धर्म की हानि होती है और संतों तथा सज्जनों पर संकट आता है तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं.रावण का अनाचार बढ़ा तो वे श्रीराम के रूप में अवतरित हुए तो कंस के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Raviranjan Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Raviranjan Kumar Singh

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन