बक्सर. स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर में दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती पीठाधीश्वर राजगुरु मठ, वाराणसी एवं आश्रम के पावन सान्निध्य में सात दिवसीय रामचरितमानस कथा का शुभारंभ हुआ. पहले दिन राष्ट्रीय कथावाचक पूज्य आचार्य महेंद्र चैतन्य जी महाराज ने कथा का प्रारंभ किया और उपस्थित श्रद्धालुओं को रामचरितमानस के महत्व से अवगत कराया. आचार्य महेंद्र चैतन्य जी ने कहा कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का संपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है. इसमें वर्णित श्रीराम का चरित्र आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मानव के रूप में जीवन जीने की प्रेरणा देता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जब समाज नैतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब रामचरितमानस का पाठ एवं श्रवण जीवन में संतुलन और शांति लाने में सहायक है. कथा के दौरान आचार्य महेंद्र चैतन्य जी ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि बिना गुरु कृपा के आत्मिक उन्नति संभव नहीं है. उन्होंने दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती और ब्रह्मलीन स्वामी विमलानंद सरस्वती के तप, त्याग और सनातन धर्म के प्रति योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया. दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती ने कहा कि आश्रम सदैव धर्म, सेवा और साधना का केंद्र रहा है, जबकि ब्रह्मलीन स्वामी विमलानंद सरस्वती का जीवन समाज को आध्यात्मिक दिशा देने में समर्पित रहा. कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक आयोजित की जाएगी और इसका समापन 14 जनवरी को स्वामी विमलानंद सरस्वती की जयंती के पावन अवसर पर होगा. श्रद्धालुओं ने कथा के महत्व और जीवन में रामकथा अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की और आश्रम में पवित्र वातावरण का अनुभव किया.
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