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शहरी के साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों में बढ़ी नियोजन के अस्थायी साधानों के इस्तेमाल की रुचि

जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं. जिसमें योग्य दंपति या लाभुकों को परिवार नियोजन के स्थायी साधन के साथ साथ अस्थाई साधनों के उपयोग पर बल दिया जाता है

बक्सर. जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं. जिसमें योग्य दंपति या लाभुकों को परिवार नियोजन के स्थायी साधन के साथ साथ अस्थाई साधनों के उपयोग पर बल दिया जाता है. जिससे लोग परिवार नियोजन के साधनों के प्रति जागरूक हो और उनका इस्तेमाल करें. जिसकी बदौलत आज शहरी के साथ साथ ग्रामीण स्तर पर भी लोग परिवार नियोजन के स्थायी साधानों के साथ साथ अस्थाई साधनों के प्रति जागरूक हुए हैं. जिसमें ग्रामीण इलाकों के लोगों द्वारा सबसे अधिक अस्थायी साधनों का प्रयोग करने लगे हैं. जो ग्रामीण इलाकों में लोगों के जागरूक होने का सबूत दे रहा है. सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि पूर्व में लोगों को नियोजन के स्थायी या अस्थायी साधन दोनों के इस्तेमाल कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. लेकिन अब जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में च्वाइस बॉक्स रखा गया है. जिसमें पड़े नियोजन के अस्थायी साधानों का प्रयोग लाभुक बेधड़क कर रहे हैं. जिसमें सबसे अहम भूमिका जिले में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स ने निभाई है. जहां पर महिला या पुरुष लाभुक अपनी सुविधा अनुसार अपने इच्छा के साधन का उठाव करते हैं. हालांकि, इसके लिए आशा कार्यकर्ताएं भी बधाई की पात्र हैं, जिन्होंने लोगों को स्थायी के साथ साथ अस्थाई साधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने में अपनी महती भूमिका अदा की है. 177 पुरुषों के लक्ष्य में 175 ने कराई नसबंदी: अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के लोगों में परिवार नियोजन के साधनों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक माह की 14 वीं तिथि को सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स के साथ सरकारी अस्पतालों में नियोजन मेला लगाया जाता है. जो ग्रामीण इलाकों में नियोजन के साधनों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में काफी कारगर साबित हुआ है. इन्हीं अभियानों की बदौलत कहा जाता है कि लोगों में स्थायी साधनों की अपेक्षा स्थायी साधनों का इस्तेमाल करने की रुचि बढ़ी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में नियोजन के स्थायी साधनों की बात करें तो जहां 3936 महिलाओं ने बंध्याकरण कराई, वहीं 175 पुरुषों ने भी नसबंदी कराई है. हालांकि, महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों की अपेक्षा अधिक है. लेकिन, इस अवधि में 177 पुरुषों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था. जिसमें 99.09 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया. वहीं, 3611 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी और 1768 महिलाओं ने आईयूसीडी का इस्तेमाल किया. जो जनसंख्या स्थिरीकरण में काफी सहायक साबित होगा. पुरुषों ने 137.49 प्रतिशत किया निरोध का इस्तेमाल : जिला सामुदायिक उत्प्रेरक हिमांशु सिंह ने बताया कि वर्ष 2023-24 में जिले के पुरुषों ने सबसे अधिक निरोध का इस्तेमाल किया. इस अवधि पुरुषों के लिए 5,29,821 निरोध के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा गया था. जिसमें जिले के सभी प्रखंडों को मिलाकर 7,28,428 निरोध की खपत सामने आई. वहीं, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की बात की जाए तो महिलाओं ने 16766, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोलियों की 80702 पैकेट और दैनिक गर्भनिरोधक गोलियों की 81435 पैकेट वितरित किए गए. साथ ही, बीते वर्ष 5711 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन की पहला डोज, 3406 ने दूसरा और 1987 महिलाओं ने इंजेक्शन की तीसरा डोज लिया है. उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा लोगों को नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों के प्रति जागरूक किया जाता है. जिसकी बदौलत अस्थायी साधनों के इस्तेमाल का यह लक्ष्य हासिल किया जा सका.

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