बक्सर में भीषण गर्मी से सूखी नदियां, वन्यजीवों पर संकट गहराया
Bihar News: राजपुर प्रखंड क्षेत्र में लगातार बारिश नहीं होने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बरसाती नदियां पूरी तरह सूख गई हैं. कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली नदियां आज गंदे नालों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ा है.
Bihar News:(पंकज कमल) बक्सर के राजपुर प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई महीनों से बारिश नहीं होने के कारण इलाके से गुजरने वाली बरसाती नदियां पूरी तरह सूख गई हैं. कभी जल से लबालब रहने वाली नदियां अब कई जगहों पर गंदे नालों का रूप ले चुकी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है, जिससे नदियों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है.
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कभी जीवनदायिनी थीं ये नदियां
पूर्वी क्षेत्र में धनसोई से होकर गुजरने वाली कंचन नदी, दक्षिण दिशा से बहने वाली धर्मावती नदी, गोरिया नदी सहित कई छोटी नदियां और सहायक नाले कभी पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माने जाते थे. इन नदियों में बरसात के समय पानी आने से बाढ़ जैसी स्थिति बनती थी, लेकिन यही पानी किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन भी था.
खेती और जीवन पर पड़ा असर
नदियों में पानी रहने से दर्जनों गांवों के किसान वैकल्पिक साधनों से सिंचाई कर समय पर खेती कर लेते थे. इससे न केवल फसल उत्पादन बेहतर होता था, बल्कि भूमिगत जल स्तर भी सामान्य बना रहता था. अब नदियों के सूख जाने से खेती-बाड़ी पर असर पड़ा है और कई जगहों पर किसानों को सिंचाई की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
वन्यजीवों और पर्यावरण पर संकट
धर्मावती नदी के किनारे बसे खीरी, बसही, जलहरा, नागपुर और गैधरा सहित कई गांवों में पहले मछुआरे नदी से मछली पकड़कर जीविका चलाते थे। अब नदी सूखने से उनकी आजीविका भी प्रभावित हुई है. इसके अलावा, पहले इस क्षेत्र में पाए जाने वाले काले और सुनहरे हिरणों के झुंड अब पानी की तलाश में गांवों की ओर भटकने लगे हैं, जिससे शिकार का खतरा भी बढ़ गया है.
प्राकृतिक सुंदरता भी खत्म होने लगी
धनसोई की कंचन नदी के किनारे स्थित जंगलिया बाबा आश्रम कभी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का केंद्र था, जहां लोग पूजा-अर्चना के साथ विश्राम भी करते थे. पहले यह क्षेत्र पशु-पक्षियों के जल क्रीड़ा स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब नदी सूखने के कारण यह सुंदरता लगभग समाप्त हो चुकी है.
संरक्षण के दावों पर उठे सवाल
वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया गया है और जगह-जगह बोर्ड भी लगाए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बोर्ड लगाने से संरक्षण संभव नहीं है. ग्रामीणों ने मांग की है कि नदियों के पुनर्जीवन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन फिर से बहाल हो सके.
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