बक्सर में चार साल से अधूरी पड़ी पर्यटन योजना, सरकार के वादे हवा-हवाई

Author Ragini Sharma|Edited by Ragini Shamra
Updated:
विज्ञापन

नौ ग्रह वाटिका की तस्वीर

Bihar News:बक्सर के चौसा स्थित महर्षि च्यवन की तपोस्थली और महादेवा घाट को ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना चार साल बाद भी अधूरी है. मनरेगा के तहत बनाई गई “नौ ग्रह वाटिका” और घाट सौंदर्यीकरण परियोजना फाइलों में सिम कर रह गई है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है.

विज्ञापन

Bihar News: (विनोद कुमार सिंह की रिपोर्ट) बक्सर का चौसा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के लिए जाना जाता है. लेकिन आज भी यह सरकारी उदासीनता का शिकार बना हुआ है. महर्षि च्यवन की तपोस्थली और गंगा तट स्थित महादेवा घाट को ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना चार साल पहले बनाई गई थी. लेकिन अब तक धरातल पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता.

मनरेगा के तहत बनी थी “नौ ग्रह वाटिका” योजना

चार वर्ष पूर्व मनरेगा के तहत महर्षि च्यवनाश्रम परिसर में “नौ ग्रह वाटिका” बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. योजना के अनुसार नौ ग्रहों से जुड़े पेड़ों के साथ 38 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां लगाई जानी थीं. इसका उद्देश्य लोगों को च्यवनप्राश की उत्पत्ति से जुड़ी वनस्पतियों की जानकारी देना और क्षेत्र को औषधीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना था.

इसके अलावा गंगा तट पर पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था, फेवर ब्लॉक सोलिंग, बेंच, लाइटिंग और सूर्यास्त दर्शन जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी योजना थी.

चार साल बाद भी नहीं लगा एक भी पौधा

स्थिति यह है कि योजना की शुरुआत तो हुई, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया. न तो वाटिका में पौधारोपण हुआ, न मूर्तियां स्थापित की गईं. न ही घाट पर बैठने या रोशनी की कोई व्यवस्था की गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना फाइलों में ही दबकर रह गई.

धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है स्थल

गंगा नदी के उत्तरायणी बहाव के कारण महादेवा घाट धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर भार्गव ऋषि च्यवन ने तपस्या की थी. जिससे इस क्षेत्र का नाम “चौसा” पड़ा. सावन माह में हजारों कांवरिये यहां से जल भरते हैं, जबकि विभिन्न पर्व-त्योहारों पर यहां मेला भी लगता है.

स्थानीय लोगों में नाराजगी

ग्रामीणों का मानना है कि यदि योजना समय पर पूरी हो जाती तो चौसा राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना सकता था. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलते. फिलहाल अधूरी परियोजना प्रशासनिक लापरवाही और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति उपेक्षा का प्रतीक बन गई है.

Also Read: आरा में रसोई गैस को लेकर हाहाकार: सिलेंडर की किल्लत से बढ़ी उपभोक्ताओं की मुश्किलें, कालाबाजारी तेज

विज्ञापन
Ragini Sharma

लेखक के बारे में

By Ragini Sharma

मैं रागिनी शर्मा वर्तमान में पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की. इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन