धन का दसवां हस्सिा करें दान : त्रिदंडी स्वामी

Published at :19 Jan 2016 7:00 PM (IST)
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धन का दसवां हस्सिा करें दान : त्रिदंडी स्वामी

धन का दसवां हिस्सा करें दान : त्रिदंडी स्वामी पिपराढ़ में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजनबक्सर. राजपुर प्रखंड के पिपराढ़ गांव में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने कहा कि संसार के लोगों को धन कमाते समय किसी को कष्ट नहीं देना चाहिए और धन का दसवां […]

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धन का दसवां हिस्सा करें दान : त्रिदंडी स्वामी पिपराढ़ में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजनबक्सर. राजपुर प्रखंड के पिपराढ़ गांव में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने कहा कि संसार के लोगों को धन कमाते समय किसी को कष्ट नहीं देना चाहिए और धन का दसवां अंश धर्म में दान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि धर्म,संस्कृति की रक्षा, देवालय, विद्यालय के निर्माण और अनुष्ठान के लिए दान देना चाहिए. दान देने से धन की शुद्धि होती है और व्यक्ति आगे की ओर बढ़ता है. दान से सांसारिक लोगों का लगाव धर्म के प्रति होता है. भीष्म पितामह ने पांडवों को धर्म का उपदेश देते हुए दान और राज धर्म के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि राजा का बेटा ही उनका बेटा नहीं होता बल्कि राज्य की पूरी प्रजा के लोग उनके संतान हैं. इस भाव से राजा को राज करना चाहिए. राजा को जो पद मिलता है उसे प्रसाद के स्वरूप में मानना चाहिए. प्रसाद किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं होता बल्कि उस पर सबका अधिकार होता है. वैसे ही राजा को प्रजा की सेवा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस राजा के राज में अपराध, अनाचार, पाप होता है उसे राजा को भोगना पड़ता है. कथा सुनने के लिए आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है. कथा का विधिवत समापन 22 जनवरी को भंडारा के साथ होगा.

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