बक्सर के स्कूल में गर्मी का कहर, एक साथ 10 छात्र बेहोश होने से मचा हंगामा

Published by :Pratyush Prashant
Published at :20 Apr 2026 3:27 PM (IST)
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Buxer News

बक्सर में गर्मी के कारण एक साथ 10 छात्र-छात्राएं हुए बेहोश

Bihar News: बिहार में बढ़ती गर्मी और लू का असर अब स्कूलों में भी दिखने लगा है. बक्सर जिले के राजपुर प्रखंड स्थित कनेहरी उच्च विद्यालय में सोमवार को भीषण गर्मी के कारण 10 छात्र-छात्राएं अचानक बेहोश हो गए, जिससे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया.

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Bihar News: बक्सर जिले के राजपुर प्रखंड में कनेहरी उच्च विद्यालय में सोमवार की सुबह पढ़ाई शुरू होते ही चीख-पुकार मच गई. भीषण गर्मी और जानलेवा लू के कारण स्कूल परिसर देखते ही देखते अस्पताल जैसा मंजर पेश करने लगा. करीब 10 छात्र-छात्राएं एक के बाद एक गश खाकर जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया.

चेतना सत्र के बाद मच गई अफरा-तफरी

सोमवार की सुबह बच्चे रोज की तरह उम्मीद के साथ स्कूल पहुंचे थे. सुबह के चेतना सत्र (प्रार्थना) तक सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन जैसे ही पहली घंटी बजी और बच्चे अपनी कक्षाओं में पढ़ाई के लिए बैठे, गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया.

उमस और लू के थपेड़ों के बीच अचानक एक छात्र बेहोश हुआ और देखते ही देखते यह सिलसिला 10 बच्चों तक पहुंच गया. स्कूल के कमरों में अचानक बच्चों के गिरने की खबर से शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई.

प्रिंसिपल की तत्परता से टली बड़ी अनहोनी

स्थिति बिगड़ते देख विद्यालय के प्रिंसिपल अरबिंद कुमार सिंह ने तुरंत मोर्चा संभाला. उन्होंने प्रभावित छात्र-छात्राओं को आनन-फानन में पंखे के नीचे लिटाया और पानी के छीटें मारकर प्राथमिक उपचार शुरू किया. जैसे ही यह खबर गांव में फैली, बड़ी संख्या में डरे-सहमे अभिभावक और ग्रामीण स्कूल की ओर दौड़ पड़े.

हर कोई अपने बच्चे की सलामती जानने को बेताब था. प्रिंसिपल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और स्कूल में मची अव्यवस्था को संभालने की कोशिश की.

9 बजे ही बजानी पड़ी छुट्टी की घंटी

बक्सर में बढ़ते पारे और बच्चों की नाजुक हालत को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग के निर्देश पर सुबह 9:00 बजे ही स्कूल की छुट्टी कर दी गई. अभिभावकों का कहना है कि जब पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है, तो ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव या छुट्टियों पर विचार क्यों नहीं किया गया? फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक दावों और गर्मी से बचाव के इंतजामों की पोल खोल दी है. (इनपुट-पंकज कमल)

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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