शेरू की फांसी की सजा को हाइकोर्ट ने किया खारिज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Feb 2020 2:18 AM

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बक्सर : बक्सर में चूना व्यवसायी राजेंद्र प्रसाद केसरी हत्याकांड के मुख्य आरोपित और कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले कुख्यात ओंकार नाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह को पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बड़ी राहत देते हुए बक्सर व्यवहार न्यायालय से मिली फांसी की सजा को खारिज कर दिया है. पटना हाइकोर्ट के […]

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बक्सर : बक्सर में चूना व्यवसायी राजेंद्र प्रसाद केसरी हत्याकांड के मुख्य आरोपित और कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले कुख्यात ओंकार नाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह को पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बड़ी राहत देते हुए बक्सर व्यवहार न्यायालय से मिली फांसी की सजा को खारिज कर दिया है.

पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल के नेतृत्व में अनिल कुमार उपाध्याय के साथ डबल बेंच के न्यायालय ने शेरू सिंह के द्वारा की गयी अपील के आलोक में दिये गये अपने आदेश में बक्सर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मलिक के आदेश को गैर जिम्मेदाराना ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से उस आदेश को रद्द कर दिया है. साथ ही चार हफ्ते के अंदर बक्सर सिविल कोर्ट को फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है.

मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने जजमेंट में कहा कि फांसी जैसे मामलों में इस तरह जल्दीबाजी एवं बिना तथ्यों को समझे निर्णय देना दुर्भाग्यपूर्ण है.

बक्सर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मल्लिक के द्वारा सुनाये गये निर्णय को उच्च न्यायालय ने ऐसे गंभीर मामलों में बिना किसी गंभीर न्यायिक बारीकियों को समझते हुए फांसी की सजा का निर्णय देने की जल्दबाजी में आश्चर्य व्यक्त किया है और निर्देश दिया है कि बिहार न्यायिक अकादमी में सभी सत्र न्यायाधीश को अपराध की गंभीरता और सजा देने की बारीकियों पर संवेदनशील किया जाये. वहीं न्यायिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने कहा कि आखिर क्यों एक ही मामले में तीन आरोपितों को अलग-अलग सजा दी गयी है.

बता दें कि 11 अगस्त 2011 को कुख्यात शेरू सिंह ने अपने तीन साथी चंदन मिश्रा और छोटू मिश्रा के साथ रंगदारी नहीं मिलने पर चुना व्यवसायी राजेंद्र केशरी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद सभी भागने में सफल रहे थे.

वहीं पुलिस ने चंदन मिश्रा और शेरू को बंगाल से गिरफ्तार कर बक्सर लायी थी. इसी बीच 17 दिसंबर, 2012 को कोर्ट में पेशी के दौरान शेरू सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक सिपाही की हत्या कर फरार हो गया था. इसके बाद एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.

वहीं मामले की सुनवाई के दौरान चंदन को उम्रकैद की सजा मिल गयी थी. वहीं 16 मई, 2016 को बक्सर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मल्लिक ने शेरू सिंह को चुना व्यवसायी हत्या कांड में फांसी की सजा सुनाई थी. जहां शेरू सिंह ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जहां हाइकोर्ट ने मामले की फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया, साथ ही आरोपित की सारी बातें सुनने का भी आदेश दिया.

चार हफ्तों के अंदर नया आदेश जारी करने का निर्देश: अपने 99 पृष्ठों के आदेश में पटना हाइ कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने शेरू सिंह के द्वारा घटना के समय खुद के नाबालिग होने के दावे के मद्देनजर पीएमसीएच के पांच डॉक्टरों की टीम के द्वारा इसकी पुष्टि करने के लिए मेडिकल कराने का अदेश दिया है.

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश को निरस्त करने का आशय यह नहीं है कि शेरू सिंह को उसके गुनाहों की सजा नहीं मिलेगी. उच्च न्यायालय ने मामले का पुनः विचारण चार हफ्तों में करने का आदेश जिला न्यायाधीश बक्सर को दिया है.

कई मामले बक्सर, आरा और भागलपुर में है दर्ज : शेरू सिंह पर बक्सर, आरा, भागलपुर समेत यूपी के कई जिलों में मामला दर्ज है. वहीं कई मामलों में शेरू रिहा भी हो चुका है, जिसमें सबसे अधिक बक्सर में मामला दर्ज है.

इसमें चूना व्यवसायी हत्याकांड चर्चित हत्याकांड था. वहीं शेरू पर रणवीर सेना के पूर्व एरिया कमांडर धनजी सिंह की हत्या में भी नाम आया था. साथ ही सीवान में डॉक्टर की हत्या में भी नाम शामिल था. ऐसे कई मामले अब भी जिसमें शेरू सिंह का नाम शामिल है.

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