जिले में एक भी किसान को नहीं मिला डीजल अनुदान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Sep 2019 6:20 AM

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बक्सर : बक्सर जिला सूखे की चपेट में है. न आसमान से बारिश हो रही है और न लोगों को डीजल अनुदान की राशि मिल रही है. सूखे की मार झेल रहे किसान डीजल अनुदान की राशि लेने के लिए कार्यालयों का चक्कर काटने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि जिले के सत्तर फीसदी […]

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बक्सर : बक्सर जिला सूखे की चपेट में है. न आसमान से बारिश हो रही है और न लोगों को डीजल अनुदान की राशि मिल रही है. सूखे की मार झेल रहे किसान डीजल अनुदान की राशि लेने के लिए कार्यालयों का चक्कर काटने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि जिले के सत्तर फीसदी राजकीय नलकूप भी अनुपयोगी हो गये हैं.

ऐसी स्थिति में किसान धान की फसल को बचाने को लेकर बेचैन दिख रहे हैं. फसल सूखने के कगार पर पहुंच गये हैं. किसान डीजल अनुदान को लेकर कागजी प्रक्रिया में उलझे हैं. कागजी कार्रवाई पूरी करने व कई स्तरों से जांच पूरी होने के बाद ही डीजल अनुदान की राशि किसानों के खाते में दिये जाने का प्रावधान है.
इधर, स्थिति यह है कि किसानों के खेतों में दरारें उभर आयी हैं. जबकि सरकार ने मौसम के हालात को देखते हुए सरकार ने किसानों को डीजल अनुदान देने की घोषणा की है. मगर कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों के आवेदन करने के बाद डीजल अनुदान 25 दिनों में देने का प्रावधान है.
अभी तक बक्सर जिला में डीजल अनुदान के लिए 74 हजार 545 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है. मगर स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक जिले के एक भी किसानों को डीजल का अनुदान नहीं मिला है. इसमें भी आश्चर्य इस बात की है कि 4500 किसानों का आवेदन विभाग ने अस्वीकृत कर दिया है.
74 हजार 545 किसानों ने ऑनलाइन किया था आवेदन
बक्सर : बक्सर जिला सूखे की चपेट में है. न आसमान से बारिश हो रही है और न लोगों को डीजल अनुदान की राशि मिल रही है. सूखे की मार झेल रहे किसान डीजल अनुदान की राशि लेने के लिए कार्यालयों का चक्कर काटने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि जिले के सत्तर फीसदी राजकीय नलकूप भी अनुपयोगी हो गये हैं.
ऐसी स्थिति में किसान धान की फसल को बचाने को लेकर बेचैन दिख रहे हैं. फसल सूखने के कगार पर पहुंच गये हैं. किसान डीजल अनुदान को लेकर कागजी प्रक्रिया में उलझे हैं. कागजी कार्रवाई पूरी करने व कई स्तरों से जांच पूरी होने के बाद ही डीजल अनुदान की राशि किसानों के खाते में दिये जाने का प्रावधान है.
इधर, स्थिति यह है कि किसानों के खेतों में दरारें उभर आयी हैं. जबकि सरकार ने मौसम के हालात को देखते हुए सरकार ने किसानों को डीजल अनुदान देने की घोषणा की है. मगर कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों के आवेदन करने के बाद डीजल अनुदान 25 दिनों में देने का प्रावधान है.
अभी तक बक्सर जिला में डीजल अनुदान के लिए 74 हजार 545 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है. मगर स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक जिले के एक भी किसानों को डीजल का अनुदान नहीं मिला है. इसमें भी आश्चर्य इस बात की है कि 4500 किसानों का आवेदन विभाग ने अस्वीकृत कर दिया है.
पेंडिंग पड़े आवेदनों को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
प्रखंड कृषि समन्वयक के यहां 1095 आवेदन कागजी जांच में पेंच में पड़ गया है. इन पेंडिंग पड़े आवेदनों को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. प्रखंड कृषि समन्वयक के स्तर से जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण किसान डीजल अनुदान के लिए भटक रहे हैं.
उनके जांच के उपरांत यह आवेदन अग्रेतर कार्रवाई के लिये जिला कृषि पदाधिकारी को हस्तगत होगा. जबकि मौसम की बेरुखी और सिंचाई संसाधनों के फेल होने जैसे हालात में किसानों को मुसीबत में डाल दिया है.
जिन छोटे किसानों ने अपनी खेती निजी नलकूपों के सहारे किया है, उन्हें भी मंहगे डीजल को खरीदकर पटवन कर धान की फसल बचाने में जुटे हैं. जबकि जिला में धान की खेती कुल 90 हजार हेक्टेयर में करने लक्ष्य जिला कृषि विभाग ने पूरा कर लिया है. मगर धान की फसल बचाने के लिए अब किसान परेशान हैं.
बोले जिला कृषि पदाधिकारी
जिले के कुल 59 हजार 500 आवेदनों की स्वीकृति भुगतान के लिए कर दी गयी है. मगर ताज्जुब की बात यह है कि स्वीकृत आवेदनों की राशि भी किसानों को नहीं मिल पायी है. किसानों को दो अगस्त से आवेदन ऑनलाइन जमा करना शुरू कर दिया था. अब तक किसानों के कुल आवेदनों की संख्या 74 हजार 545 बताया जाता है.
कृष्णकांत चक्रवर्ती, जिला कृषि पदाधिकारी
सूखाग्रस्त घोषित हो जिला
सूबे के 18 जिलों को सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है. मगर बक्सर जिला को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किये जाने पर कांग्रेस के नेता टीएन चौबे ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार पर नाइंसाफी का आरोप लगाया है. उन्होंने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि गत साल भी बक्सर जिला के साथ सौतेला व्यवहार किया गया था. उन्होंने कहा है कि किसानों का धान सूख रहा है. मौसम की मार से किसान परेशान हैं.
यहां के नहरों में पानी का अभाव है. बावजूद इसके बक्सर जिला को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाना कहीं से भी उचित नहीं है.
डीजल अनुदान नहीं मिलने से परेशानी
खेतों में रोपे गये धान के पौधे सूख रहे हैं. डीजल अनुदान के लिए आवेदन भी विभाग को दिये हुए एक माह गुजर गये. मगर अभी तक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुआ.
विनोद चौबे
बारिश नहीं होने के चलते धान की फसल को क्षति पहुंच रहा है. डीजल अनुदान के लिए आवेदन विभाग में स्वीकृत भी हो गया है. मगर अनुदान की राशि नहीं मिला है.
धीरेंद्र दुबे
डीजल अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन किये हुए एक माह से ऊपर का समय गुजर गया है. विभाग में पूछने पर कुछ भी पता नहीं चलता है.
सतीश सिंह
-सुखाड़ की दौर से जिला गुजर रहा है. खेतों में दरार पड़ गये हैं. रोपे गये धान की फसल अब सूखने के कगार पर पहुंच गयी है मगर डीजल अनुदान की राशि नसीब नहीं हुआ. प्रकाश सिंह
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