मच्छरों के डंक से लोगों की नींद गुम
Updated at : 24 Aug 2019 6:17 AM (IST)
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डुमरांव : बरसात के दिनों में मच्छरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है. जानलेवा मच्छरों के प्रकोप से बचाव को लेकर नप प्रशासन अबतक कोई सुरक्षा के उपाय नहीं ढूंढ़ सका है और न ही जमीनी स्तर पर कोई कदम उठाये गये हैं. इसके डंक से बचने के लिए शहरवासी दिन में भी खिड़की […]
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डुमरांव : बरसात के दिनों में मच्छरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है. जानलेवा मच्छरों के प्रकोप से बचाव को लेकर नप प्रशासन अबतक कोई सुरक्षा के उपाय नहीं ढूंढ़ सका है और न ही जमीनी स्तर पर कोई कदम उठाये गये हैं. इसके डंक से बचने के लिए शहरवासी दिन में भी खिड़की व दरवाजे बंद रख रहे हैं.
पिछले पांच माह से नगर पर्षद द्वारा मच्छर मार दवा का छिड़काव नहीं कराया गया. ऐसी स्थिति में छिड़काव वाली फॉगिंग मशीन जंग लगने के कगार पर पहुंच गयी है. मच्छरों के बढ़ते डंक के कारण डेंगू, चिकनगुनिया जैसे रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गयी है और लोग दहशत में हैं.
इसके चपेट में आने के बाद इलाज में धन के साथ-साथ जान भी गंवाने का भय बना रहता है. पिछले वर्ष की चर्चा करें तो मच्छरजनित बीमारियों की चपेट में आकर शहर के दर्जनों लोग प्रभावित हुए थे और प्राइवेट डॉक्टरों के इलाज के बाद पटना तक भी दौड़ लगायी थी. काफी राशि खर्च कर वे स्वस्थ हुए.
बताया जाता है कि शहर के नालियों में भरी गाद व गंदगी के कारण मच्छरों की संख्या में इजाफा हो रहा है. अगर नप प्रशासन द्वारा फॉगिंग मशीन से दवा का छिड़काव होता तो खतरनाक एडिस मच्छरों का लावा बड़ी संख्या में नष्ट होते और मच्छरों के प्रकोप से लोगों को राहत मिलता.
पांच घंटे में तीन हजार की राशि खर्च :
फॉगिंग मशीन से दवा छिड़काव करने के लिए 10 लीटर डीजल में 1 लीटर केमिकल का मिश्रण किया जाता है. इस मिश्रण को फॉगिंग मशीन में डालकर छिड़काव होता है. पांच घंटे के छिड़काव में नप को करीब तीन हजार रुपये की लागत आती है.
शहर में एक बार दवा का छिड़काव होने पर इसका असर मच्छरों के ऊपर 24 घंटे तक रहता है. साथ ही खतरनाक एडिस मच्छरों का लावा पनपने से पहले ही नष्ट हो जाता है.
इन इलाकों में होता है जलजमाव :
नगर परिषद क्षेत्र के शहीद गेट, टेक्सटाइल कॉलोनी, कड़वी, शिवपुरी, साफाखाना रोड, हरिजी के हाता सहित अन्य इलाकों में बरसात के दिनों में जलजमाव होता है.
कई मोहल्लों में बरसात का पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का डर बना रहता है और मच्छरजनित बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है. जानकार बताते है कि गंदे पानियों के बहाव रुकने और बस्तियों में गंदगी पसरने से अधिक मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है.
हर सप्ताह होगा छिड़काव : नगर पर्षद के नये बोर्ड ने मच्छरों से बचाव को लेकर कई योजनाएं बनायी हैं. बोर्ड में प्रस्तावित प्रस्ताव पर मुहर लगायी गयी है. हर सप्ताह फॉगिंग मशीन से दवा का छिड़काव कराया जायेगा. भागमनी देवी, चेयरमैन नप डुमरांव.
मच्छर पनपने से करे बचाव
मच्छरदानी का करे उपयोग.
घरों की साफ-सफाई.
मवेशी खटाल की नियमित सफाई.
कूलर के पानी का बदलाव.
पौधे के गमले की सफाई.
बाथरूम व शौचालय की सफाई.
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