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1474 आशा घर-घर जाकर खिलायेंगी दवा

Updated at : 08 Aug 2019 5:52 AM (IST)
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1474 आशा घर-घर जाकर खिलायेंगी दवा

बक्सर : फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जिला सहित अन्य प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम(एमडीए) की शुरुआत की गयी. इस अवसर पर जिला सदर अस्पताल में जिला सिविल सर्जन के साथ अन्य जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने फाइलेरिया की दवा सेवन कर कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत की. इस अवसर पर जिला सिविल सर्जन डॉ उषा किरण […]

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बक्सर : फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जिला सहित अन्य प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम(एमडीए) की शुरुआत की गयी. इस अवसर पर जिला सदर अस्पताल में जिला सिविल सर्जन के साथ अन्य जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने फाइलेरिया की दवा सेवन कर कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत की.

इस अवसर पर जिला सिविल सर्जन डॉ उषा किरण वर्मा ने बताया फाइलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में अगले 14 दिनों तक सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जायेगा. इस अभियान को सफल बनाने के लिए आशा घर-घर जाकर 2 साल से अधिक उम्र के लोगों को अपने सामने फाइलेरिया की दवा खिलायेंगी.
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जिसे फाइलेरिया की दवा सेवन से ही बचा जा सकता है. कभी-कभी फाइलेरिया के परजीवी शरीर में होने के बाद भी इसके लक्षण सामने आने में वर्षों लग जाता है. इसलिए फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद है. उन्होंने बताया लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें.
उन्होंने बताया 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रोग से ग्रसित एवं गर्भवती महिला को फाइलेरिया की दवा नहीं खिलाई जायेगी. जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार राजीव कुमार ने बताया कि अभियान के कुशल क्रियान्वयन के लिए दो आशाओं की एक टीम बनायी गयी है. जिसमें कुल 1474 आशाओं के साथ 1636 ड्रग एड्मिनिस्ट्रेटरों की नियुक्ति की गयी है. आशाओं के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए कुल 72 आशा पर्यवेक्षकों की तैनाती की गयी है. साथ ही कुल 82 ड्रूग सुपरवाइजरों को अभियान के बेहतर अनुश्रवण की ज़िम्मेदारी दी गयी है.
क्या है फाइलेरिया: इसे हाथीपावं रोग के नाम से भी जाना जाता है. बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया की शुरूआती लक्ष्ण होते हैं. यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है.
आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है. फाइलेरिया से जुड़ी दिव्यांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है.
ऐसे खानी है लोगों को दवा
इस अभियान में डीईसी एवं एल्बेंडाजोल की गोलियां लोगों की दी जायेगी. 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं एल्बेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं एल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं एलबेंडाजोल की एक गोली दी जायेगी.
एल्बेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है. अभियान के विषय में जन-जागरूकता बढ़ाने में जीविका, पंचायती राज विभाग एवं शिक्षा विभाग के साथ पीसीआई की अहम भूमिका होगी.
जिले के सभी स्कूलों में अभियान को लेकर प्रभातफेरी के साथ प्रार्थना सभा में इसके विषय में बच्चों को जागरूक किया जायेगा. जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों में जीविका कार्यकर्ता अभियान के दौरान फाइलेरिया दवा के बारे में लोगों को अवगत करायेगी. साथ ही यह सुनश्चित करायेगी कि अभियान में दवा का सेवन शत-प्रतिशत हो.
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