जलजमाव को ले छात्र उतरे सड़क पर
Updated at : 25 Jun 2019 4:55 AM (IST)
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बक्सर : शहर के चरित्रवन स्थित चौसा मार्ग पर लगभग 26 एकड़ में फैला बक्सर औद्योगिक संस्थान में जलजमाव से परेशान होकर सोमवार को छात्र-छात्राएं सड़क पर उतरे आये. प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. जलनिकासी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पानी के बीच में खड़ा होकर प्रदर्शन किया. जिसे लेकर […]
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बक्सर : शहर के चरित्रवन स्थित चौसा मार्ग पर लगभग 26 एकड़ में फैला बक्सर औद्योगिक संस्थान में जलजमाव से परेशान होकर सोमवार को छात्र-छात्राएं सड़क पर उतरे आये. प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. जलनिकासी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पानी के बीच में खड़ा होकर प्रदर्शन किया. जिसे लेकर अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया.
हालांकि आइटीआइ प्रशासन ने गुस्साये छात्र-छात्राओं को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया. बता दें कि नगर के चरित्रवन स्थित बक्सर चौसा मार्ग पर बक्सर औद्योगिक संस्थान संचालित होता है.
परिसर कई वार्डों के नालियों के निस्तारित पानी के कारण जलजमाव का केंद्र बना हुआ है. मॉनसून की पहली बारिश के कारण परिसर में डेढ़ से दो फुट नाली का गंदा पानी जमा हो गया है. कार्यालय और क्लास रूम में जाने वाली सड़क पर पानी जमा होने के कारण आवागमन रुक गया है. प्रतिदिन नाली के पानी से गुजरने वाले बच्चों का सोमवार को आक्रोश फूट गया और वे सड़क पर उतर गये.
संस्थान के परिसर में डेढ़ से दो फुट जमे पानी में खड़ा होकर जिला प्रशासन, नगर पर्षद एवं आइटीआइ प्रशासन के विरुद्ध जमकर घंटों प्रदर्शन एवं नारेबाजी की. गुस्साये छात्र-छात्राओं को आइटीआइ प्रशासन ने जलनिकासी की समस्या को दूर करने करने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किये जाने के बात कही.
संस्थान में सात सौ से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं. जिसमें बच्चे-बच्चियां शामिल हैं. सोमवार को जैसे ही पढ़ने के लिए बच्चे संस्थान में आये वे सभी सड़क पर पानी देखकर भड़क गये. गौरतलब है कि जलजमाव की वजह से न केवल आइटीआइ के मैदान का अस्तित्व समाप्त हो गया है, बल्कि क्लास रूम व कार्यालय के चारों तरफ पानी में उगने वाले घास उग आये हैं.
कई वार्डों के पानी गिरने से कायम है समस्या : आइटीआइ परिसर के चारों तरफ से क्रंकीट के मकानों के बन जाने से इसके जलनिकासी की व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है. कारण आइटीआइ का परिसर आसपास के मकानों से नीचे हो गया है. जिसके कारण नया बाजार में पड़ने वाले आधा दर्जन वार्ड के नालियों का पानी निचले भागों में गिरता है.
जिससे बहते हुए पानी सीधे आइटीआइ परिसर में पहुंच जाता है. जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों के घरों का पानी सीधे गलियों एवं सड़कों पर बहता है. जिसके कारण पानी बहते हुए निचले हिस्से में चला जाता है. आइटीआइ परिसर निचले हिस्से में स्थित होने के कारण जलजमाव का केंद्र बन गया है.
नप की नहीं दिखती कोई कार्य योजना
जलजमाव की समस्या का निदान करने के लिए नप ने कोई कार्य योजना तैयार नहीं की है आइटीआइ परिसर को जलजमाव से मुक्त कराने को लेकर कार्य भी शुरू किया गया था. मगर कार्ययोजना फाइलों में दम तोड़ रही है.
यहीं नहीं नप का कोई ऐसा वार्ड नहीं, जिसे वे मॉडल वार्ड के रूप में प्रस्तुत कर सकें. शहर की प्रत्येक वार्ड जलजमाव की समस्या से जूझ रहा है. माॅनसून की पहली बारिश की वजह से नगर में जलजमाव हो जाने से महामारी की आशंका बलवती हो गयी है.
जमा पानी से घरों में भी सड़ांध की बदबू से लोगों को परेशानी होने लगी है. नगर पर्षद ने बरसात पूर्व न तो किसी नाली की सफाई करायी है और साफ-सफाई की कोई कार्य योजना बनायी है. जिसकी हकीकत नगर में एक दिन की बारिश ने झलक दिखा दिया है. नगर की सभी सड़कें बारिश शुरू होने के साथ ही नाला बन जाती हैं.
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