वार्ड में लोगों को नहीं मिल रहा नल का जल
Updated at : 30 Apr 2019 1:59 AM (IST)
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राजपुर : आर्सेनिक युक्त पानी से बचाव कर आमजनों के बीच शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर जल का नल योजना इस समय बिल्कुल मंद पड़ गया है. प्रचंड गर्मी के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं. प्रखंड के सभी पंचायतों में […]
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राजपुर : आर्सेनिक युक्त पानी से बचाव कर आमजनों के बीच शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर जल का नल योजना इस समय बिल्कुल मंद पड़ गया है. प्रचंड गर्मी के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं.
प्रखंड के सभी पंचायतों में कार्यरत एजेंसियों द्वारा आधा अधूरा काम को छोड़ दिया गया है. इन दिनों प्रतिदिन गर्मी का पारा बढ़ रहा है, लेकिन अभी तक बहुत से घरों में नल का जल नहीं पहुंचा है. इसकी वजह से आमजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
इसकी मॉनीटरिंग के लिए प्रत्येक पंचायतों के लिए एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है. बावजूद कोई भी अधिकारी किसी पंचायत का भ्रमण नहीं कर रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि कार्य एजेंसी द्वारा सभी गांवों में सभी वार्ड में गलियों के किनारे और बीच में पाइप बिछाने के लिए गड्ढे खोदे गये हैं, जिसमें कुछ जगहों पर पाइप नहीं बिछायी गयी है. अन्य जगहों पर बिछाने के बाद उसके मिट्टी के ढेर और कंक्रीट को ज्यों का त्यों छोड़ दिया गया है. इसके वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले आमजनों को काफी परेशानी हो रही हैं.
यह हाल सिर्फ एक पंचायत का नहीं बल्कि सभी पंचायतों का है. इसके बाद भी संबंधित वार्ड सदस्य या अधिकारियों द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. किसी-किसी पंचायत में तो ट्यूबवेल भी खराब हो गया है. कुछ पंचायतों में नल जल योजना का आरंभ तो किया गया, लेकिन एक सप्ताह तक चलने के बाद उसे बंद कर दिया गया है. यह योजना सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है.
सरकारी आंकड़े के अनुसार, एक पंचायत में लगभग 13 से 16 वार्ड है, जिसमें से लगभग आधा से अधिक वार्डों में इस योजना के तहत बोरवेल कर पाइप की सप्लाइ भी कर दी गयी है. फिर भी कुछ बोरवेल से मात्र कुछ की घरों तक पानी की पहुंच हो रही है.
इस तरह की समस्या से ग्रामीणों द्वारा संबंधित पंचायतों के मुखिया और वार्ड प्रबंधन समिति को भी अवगत कराया गया है, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की जा रही है. इसी तरह की समस्या बन्नी पंचायत के भरखरा गांव में भी देखा गया. जो विगत एक वर्षों से आधा अधूरा पड़ा हुआ है, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारियों द्वारा जांच पड़ताल कर इसे चालू नहीं किया गया है.
जबकि इस तरह की एक योजना को चालू करने में 12 से 15 लाख रुपये का खर्च होता है. सवाल यह उठता है कि राशि खर्च होने के बाद भी योजना का लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल रहा है.
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